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दुनिया

अहिंसा, सहनशीलता का संदेश दोहराने का दिन

गांधी जयंती के दिन से अच्छा दिन क्या हो सकता है गांधी के धार्मिक सद्भाव, अहिंसा और सहिष्णुता के संदेश को फिर से ताजा करने का. उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए समाधि से लेकर सोशल मीडिया तक ऐसे संदेशों का तांता लगा रहा.

2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 146वीं जयंती के मौके पर भारत में स्वच्छ भारत अभियान का एक साल भी पूरा हुआ. इस अवसर पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई बड़े नेता गांधी की समाधि पर श्रद्धांजली देने पहुंचे.

इसी दिन 'जय जवान, जय किसान' का नारा देने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 111वीं जयंती भी होती है, जिस पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर उन्हें भी याद किया.

वहीं कई लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि मोदी शास्त्री की समाधि पर क्यों नहीं गए.

सोशल मीडिया पर भारत भर से लोगों ने गांधी जयंती पर कई तरह के संदेश लिखे. एक यूजर ने गांधी के अहिंसा वाले एक विचार को याद करते हुए जो लिखा वह आज के असहनशील होते समाज के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है.

वहीं कुछ लोगों ने इस मौके पर किसानों की आत्महत्या की समस्या को उठाते हुए महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की संकल्पना को याद किया. 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस संकल्पना पर आधारित पंचायती राज की शुरुआत की थी. फिर भी ग्रामीणों खासकर किसानों के हालात चिंताजनक बने हुए हैं. वहीं कुछ लोगों ने इस मौके पर किसानों की आत्महत्या की समस्या को उठाते हुए महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की संकल्पना को भी याद किया.

धार्मिक असहिष्णुता और समाज के शोषित दलित वर्ग के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ महात्मा गांधी का पूरा जीवन एक संदेश है, उसके अभी भी जारी रहने का एक उदाहरण उनकी जयंती के अवसर पर भी दिखा.

उत्तर प्रदेश के ही दादरी में मुस्लिम समुदाय के एक व्यक्ति की हाल ही में हुई निशंस हत्या के पीछे भी धार्मिक असहनशीलता ही कारण बताया जा रहा है. चाहे मामला गोमांस से जुड़ा निकले या गाय की चोरी से, इतना तय है कि मृतक के बारे में अफवाहें फैला कर घृणा का माहौल बनाया गया था.

लाल बहादुर शास्त्री के बेटों ने उनकी जयंती के कुछ ही दिन पहले अपने पिता की 1966 में ताशकंद में हुई मौत से जुड़ी वर्गीकृत फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की है. कुछ ही दिन पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रहस्यमयी मौत से जुड़ी ऐसी 64 गुप्त फाइलें सार्वजनिक की हैं.