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दुनिया

अश्लीलता से कैसे बचें बच्चे

बच्चे जिज्ञासा से भरे होते हैं, लेकिन अगर उन्हें सही जबाव न मिलें तो, यौन जिज्ञासाओं के मामले में भारत के बच्चों का कुछ ऐसा ही हाल है. आसानी से उपलब्ध अश्लील सामग्री उन्हें भ्रम में डाल रही है, उनसे प्रयोग करवा रही है.

कोलकाता में इस विषय पर आयोजित एक वर्कशॉप में बच्चों में अश्लील सामग्री के बढ़ते प्रचलन पर अंकुश लगाने के प्रभावी उपायों पर भी चर्चा की गई. वर्कशॉप में महानगर के कई स्कूलों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया और अपने विचार रखे. इन शिक्षकों को यह भी बताया गया कि सेक्स संबंधी बच्चों की जिज्ञासा को कैसे शांत किया जाए. कार्यशाला में जुटे शिक्षकों ने इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति बताते हुए कहा कि ज्यादातर शिक्षकों या अभिभावकों को भी यह पता नहीं है कि इस समस्या से कैसे निपटा जाए.

खेल की सीडी में पॉर्न

कोलकाता के एक बेहद प्रतिष्ठित स्कूल के नौ साल के एक छात्र को उसके सहपाठी ने जन्मदिन पर एक सीडी भेंट की जिसमें कार-रेंसिग का खेल था. लेकिन उस बच्चे ने जब उस सीडी को अपने लैपटाप में चलाया तो वहां अश्लील वीडियो चलने लगा. संयोग से उसके पिता ने वह देख लिया और वह सीडी ले ली. 

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कोलकाता में हुई वर्कशॉप

कार्यशाला में शामिल शिक्षकों ने कहा कि ऐसे मामलों पर अंकुश लगाना बेहद मुश्किल है. सीडी और वेबसाइटों के जरिए बच्चों को आसानी से अश्लील सामग्री हासिल हो रही है. एक गैर-सरकारी संगठन उम्मीद की ओर से आयोजित इस दो–दिवसीय कार्यशाला का मकसद शिक्षकों को छात्रों में सेक्स के प्रति पनपने वाली भ्रांतियों से निपटने का सही तरीका सिखाना था. इसमें शामिल एक शिक्षक ने कहा, "मौजूदा दौर में नौ से 12 साल के छात्र सोशल नेटवर्किंग साइटों पर वर्चुअल डेटिंग का शिकार हो रहे हैं. इस खेल में हाथ पकड़ने से लेकर कमरे में साथ जाने तक के वीडियो मौजूद हैं. उसका कहना था कि यह वीडियो खेल के तौर पर है. लेकिन इससे छोटी उम्र के छात्र अश्लील सामग्री की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं."

यह तथ्य भी सामने आया कि बच्चों के यौन शोषण में घर के लोगों या रिश्तेदारों का ही ज्यादा हाथ होता है. गैर सरकारी संगठन उम्मीद की प्रमुख सलोनी प्रिया कहती हैं, "आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि ज्यादातर बच्चों का यौन शोषण घर पर उनके करीबी लोग ही करते हैं. यही वजह है कि वह दूसरों को इस बारे में नहीं बता पाते."

टीवी और इंटरनेट

सलोनी बताती हैं, "छोटी उम्र के बच्चों की यौन प्रवृत्ति जाग्रत हो रही है. पहले हम जिन चीजों को मजाक में उड़ा देते थे, उसे अब बच्चे अपना रहे हैं." उनका कहना था कि टीवी पर आने वाले तमाम विज्ञापनों में महिलाओं को सेक्स की सामग्री के तौर पर दिखाया जाता है. इससे कम उम्र के बच्चों में सेक्स के प्रति उत्सुकता बढ़ती है. यही वह समय है जब शिक्षकों व अभिभावकों को शालीनता से उनकी जिज्ञासाओं को शांत करना चाहिए. वह कहती हैं, "हम छात्रों को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि कम उम्र में यौन शोषण के नतीजे खतरनाक हो सकते हैं. स्कूलों में बुलिंग यानी धमकाने से बच्चों को बचाने के लिए तेज-तर्रार छात्रों के अलावा दूसरों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए." सलोनी के मुताबिक, छात्रों में यह भावना भरनी चाहिए कि लड़कों और लड़कियों में कोई अंतर नहीं है. इससे समस्या काफी हद तक हल हो सकती है. एक शिक्षक ने कहा, "छात्रों को तीसरी कक्षा से ही लिंग भेद के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए. इसके लिए अभिभावकों को भी पहल करना जरूरी है."

इंटरनेट का दुरुपयोग

आमतौर पर अब कई भारतीय घरों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है. लेकिन माता-पिता इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उनका बच्चा इंटरनेट का कैसा इस्तेमाल कर रहा है. कई बार बच्चे इंटरनेट से कुछ सिखने के बजाय उसका दुरूपयोग भी करने लगते हैं. कई बच्चे इंटरनेट पर सेक्स गेम खलने में जुटे हुए हैं. कई बार  जब तक माता पिता को इस बात का अहसास होता है कि उनका बच्चा अपनी उम्र से पहले बड़ा हो रहा है उसके पहले ही वह दहलीज लांघ जाता है. आजकल बच्चे अपनी बोलचाल में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते है जो कल तक कोई सोच भी नहीं सकता था. इतना ही नहीं, सेक्स की आधी-अधूरी जानकारी के साथ प्रयोग करने से भी नहीं कतराते.

आजकल की छोटी छोटी बच्चियां भी कम उम्र में  हॉट दिखना चाहती है, सेक्सी कपड़े  पहनना चाहती हैं और शीला व मुन्नी की तरह डांस करना चाहती हैं. बाल मनोविज्ञान की टीजर सुनीता दीक्षित कहती हैं, "बच्चियां यह सब इसलिए कर रही हैं क्योंकि उनको अपने आस-पास यही सब होता दिखाई दे रहा है. यही गलत सोच उन्हें बिगड़ने में बड़ी भूमिका अदा कर रही है."

फेसबुक, यूट्यूब और ऑर्कुट जैसी साइट्स पर भी इस तरह के हजारों वीडियो मिल जाएंगे. एक और टीचर सुनंदा कहती हैं, "अब यह बहुत जरूरी हो गया है कि अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें बिगड़ने और उम्र से पहले बड़ा होने से रोकें."

मौजूदा दौर में अकसर माता-पिता कामकाजी होने की वजह से बच्चों को समय नहीं दे पाते और इसकी भरपाई वह उनको ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देकर करना चाहते हैं. ऐसे में बच्चे घर में अकेले रहकर टीवी व  इंटरनेट का गलत इस्तेमाल करने लगते है.

रिपोर्ट: प्रभाकर, कोलकाता

संपादन: ओंकार सिंह जनौटी

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