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दुनिया

अवाक कर देता है दुनिया का सबसे ऊंचा झरना

दुनिया में कुछ जगहें ऐसी हैं, जहां आंखों पर यकीन नहीं होता. एंजेल फॉल्स भी इन्हीं में से एक है. करीब एक किलोमीटर ऊंचे से इस झरने से गिरने वाला पानी बीच रास्ते में ही कोहरे में बदलने लगता है.

वेनेजुएला में पहाड़ों के पथरीले रास्ते से गुजरते हुए चुरुक नदी एक चट्टान तक पहुंचती है. वहां नदी का सामना करीब एक किलोमीटर गहरी खाई से होता है. और फिर बनता है दुनिया का सबसे ऊंचा जल प्रपात, एंजेल फॉल्स. 979 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाले पानी का बड़ा हिस्सा नीचे पहुंचने से पहले ही कोहरे और नमी में तब्दील हो जाता है. नीचे तक बस रिमझिम बारिश जैसी फुहारें ही पहुंचती हैं. यह पृथ्वी पर मौजूद एक नायाब नाजरा होता है.

एंजेल फॉल्स की खोज की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. 1933 में अमेरिकी पायलट जिमी एंजेल अपने एक साथी के साथ एक खजाने की खोज कर रहे थे. वे दंतकथाओं में शामिल "मैकक्रैकन रिवर ऑफ गोल्ड" या "गोल्डन सिटी" की खोज कर रहे थे. लेकिन खजाना जैसी कोई चीज उनके हाथ नहीं लगी.

1937 में एंजेल ने अपनी पत्नी और एक दोस्त के साथ फिर उस इलाके की उड़ान भरी. तभी उड़ान में कुछ गड़बड़ी आई और एक पहाड़ की चोटी पर क्रैश लैंडिंग हुई. जंगल से बाहर निकलने के लिए तीनों 11 दिन पैदल चले और तभी उन्हें दुनिया के सबसे ऊंचे झरने का पता चला.

आज वहां जिमी एंजेल का म्यूजियम है. म्यूजियम में उस विमान का नमूना भी रखा गया है. घंने जंगल के बीचों बीचे बसे एंजेल फॉल्स को देखने आज हर साल 9 लाख लोग नाव से जाते हैं. इस दौरान जैसे ही एंजेल फॉल्स पहली बार दिखता है, वैसे ही इंसान प्रकृति की अद्भुत सुंदरता के सामने नतमस्तक सा हो जाता है.

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