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विज्ञान

अवसाद में मर रहे हैं किशोर

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर के किशोरों में बीमारी की सबसे बड़ी वजह अवसाद है. एक तिहाई किशोर मौतों का कारण अवसाद को बताया गया है. इसके बाद सड़क दुर्घटनाओं और एचआईवी का नंबर आता है.

डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट को तैयार करने में अब तक प्रकाशित किए जा चुके प्रमुख आंकड़ों का इस्तेमाल किया है. ये आंकड़े 10 से 19 साल के बीच के किशोरों से उन्हें प्रभावित करने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में पूछ कर तैयार किए गए.

डब्ल्यूएचओ की परिवार, महिला एवं बाल स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख फ्लेविया बस्ट्रियो ने कहा, "विश्व भर में किशोरों की समस्याओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती रही है." कुछ रिसर्चों में यह भी पाया गया है कि जो लोग मनोरोग से ग्रसित हैं उनमें इसका पहला लक्षण करीब 14 साल की उम्र में सामने आया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मनोरोग से जूझ रहे किशोरों पर वैसा ध्यान दिया जाए जिसकी उन्हें जरूरत है, तो कम उम्र में होने वाली मौतों और उनकी जिंदगी भर की तकलीफों को दूर किया जा सकता है.

शोध के दौरान तंबाकू सेवन, ड्रग्स, एचआईवी, शराब, यौन स्वास्थ्य और हिंसा जैसे कई अहम मुद्दों पर गौर किया गया. बीमारी और विकलांगता की दूसरी बड़ी वजह सड़क दुर्घटनाओं को पाया गया. इन कारणों की वजह से लड़कियों के मुकाबले लड़कों की तीन गुना ज्यादा मौतें होती हैं.

इस तरह के खतरों को कम करने के लिए जरूरी है कि सरकारें विश्वसनीय और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था पर गौर करें. सड़कों की मरम्मत हो, स्पीड लिमिट निर्धारित हो और शराब पीकर वाहन चलाने के खिलाफ सख्ती हो. रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि सरकारें स्कूलों के आसपास सुरक्षित फुटपाथों का इंतजाम करें. लाइसेंस मिलने की उम्र के अलावा लाइसेंस देते समय चालक की वाहन चलाने की काबलियत पर भी ध्यान दिया जाए.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2012 में 13 लाख किशोरों की मौत हुईं. इनके प्रमुख कारण सड़क दुर्घटनाएं, एचआईवी/एड्स और आत्महत्या रहे. दनिया भर में एचआईवी से मरने वाले किशोरों की संख्या में वृद्दि हो रही है, खासकर अफ्रीका में.

रिपोर्ट को तैयार करने वाली डब्ल्यूएचओ की प्रमुख रिसर्चर जेन फर्गसन ने बताया, "किशोरों में एचआईवी से बचने के तरीकों और यौन स्वास्थ्य के बारे में जागरुकता फैलाने की हमारी कोशिशों में कमी नहीं आनी चाहिए."

किशोर लड़कियों में आत्महत्या के बाद मृत्यु की दूसरी बड़ी वजह कच्ची उम्र में बच्चे को जन्म देना पाया गया. यह हाल तब है जब कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्टों के अनुसार 2000 से अब तक एशिया में इसे 57 फीसदी, मध्यपूर्व में 50 फीसदी और अफ्रीका में 37 फीसदी कम करने में सफलता मिली है.

एसएफ/ओएसजे (एएफपी)

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