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ताना बाना

अल बारादेई: हिचकिचाहट भरा नेतृत्व

मिस्र में पिछले सप्ताह तनावपूर्ण हालात के बीच लौटे मोहम्मद अल बारादेई. जहां एक तरफ उनकी वापसी को उम्मीद की किरण माना जा रहा है वही दूसरी ओर यह शंका भी है कि क्या एशो आराम के शौकीन अल बारादेई देश को संभाल पाएंगे.

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मिस्र के काहिरा में जन्मे 68 वर्षीय मोहम्मद अलबरदेई को संभावित राष्ट्रपति के रूप में देखा जा रहा है. मिस्र में राष्ट्रपति के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच लोकतंत्र समर्थक नेता मोहम्मद अल बारादेई ने आते ही राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि नए उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की नियुक्ति काफी नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र से आईएईए तक का सफर

मिस्र और अमेरिका में कानून की पढ़ाई कर के अल बारादेई ने 1964 में काहिरा के विदेश मंत्रालय से अपने करियर की शुरुआत की. वे इजराएल के साथ शांति स्थापित करने के लिए बनाए गए दल का हिस्सा रहे. बाद में वे संयुक्त राष्ट्र में मिस्र के प्रतिनिधि बन कर न्यूयॉर्क और जेनेवा गए. 1984 में वे विएना में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) गए और 1997 में संगठन के महानिदेशक नियुक्त किए गए. 12 साल तक आईएईए का नेतृत्व करने के बाद 2009 में वे सेवानिवृत हुए, जिसके चार ही महीने बाद फरवरी 2010 में वे काहिरा लौट आए.

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मिस्र सरकार से उनकी अनबन चलती रही. सरकार ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र में मिस्र के प्रतिनिधि के रूप में देखना भी पसंद नहीं किया. यहां तक कि जब 2005 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया तब भी सरकार इस से खुश नहीं दिखी. पिछले साल उनकी वापसी के बाद से ही उन्हें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में देखा जाने लगा. अल बारादेई भी इस से काफी खुश थे, लेकिन सुधारों के प्रस्ताव मिस्र की सरकार को प्रभावित नहीं कर पाए. इसके बाद मीडिया ने भी उनके और उनके परिवार के खिलाफ रिपोर्टें लिखनी शुरू की जिसके कारण उन्होंने राजनीति से दूर रहने का निर्णय कर लिया और वे विएना लौट गए.

देश में विवादास्पद वापसी

हाल ही में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों के बीच अल बारादेई दोबारा मिस्र लौट आए. वापस लौटते ही वे सुर्ख़ियों में छा गए. आते ही उन्होंने यह साफ कर दिया कि मिस्र में उनकी जान को खतरा है. उन्होंने कहा कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन वे अपने लोगों के साथ रहना चाहते हैं और इसीलिए वापस लौटे हैं. साथ ही उन्होंने किसी भी तरह की सुरक्षा लेने से भी इनकार किया.

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हालांकि वापस लौट कर उन्होंने साफ साफ पद संभालने की इच्छा प्रकट नहीं की. उन्होंने बस कहा कि वो आम लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे इस विरोध में लोगों का साथ देने के लिए और लोकतंत्र का निर्माण करने के लिए देश वापस लौटे हैं. देश में प्रदर्शनों को शुरू होता देख अल बारादेई ने लगातार सोशल नेट्वर्किंग साईट ट्विटर द्वारा अपने विचार व्यक्त किए और प्रदर्शनों का समर्थन किया. उन्होंने लिखा, "हमें शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते रहना चाहिए और अपनी आजादी के लिए लड़ते रहना चाहिए." अल बारादेई ने पहले तो किसी राजनैतिक पार्टी का गठन करने की घोषणा नहीं की लेकिन अपनी लोकप्रियता बढती देख उन्होंने कहा "अगर लोग यही चाहते हैं तो मैं उनकी इच्छा का सम्मान करूंगा."

नागरिकों की उम्मीदें

फेसबुक पर दो लाख से अधिक लोगों ने अल बारादेई के सत्ता में आने का समर्थन किया है. ट्विट्टर पर उन्होंने लिखा, "मैं चाहता हूं कि मिस्र 21वीं सदी का देश बने जहां मौलिक अधिकारों का सम्मान होता हो और लोग स्वतंत्र हों." अल बारादेई प्रदर्शनों में लोगों के साथ हिस्सा ले रहे हैं. उन्होंने कहा, "मेरी इच्छा तो यही थी कि हमें सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सड़कों पर न उतरना पड़े, लेकिन अगर जनता मुझसे साथ खड़े होने की उम्मीद करती है तो मैं उसे निराश नहीं करुंगा." राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के तीस साल से शासन में रहने से लोगों में नाराजगी भरी हुई है और वे अल बारादेई को अपने नए नेता के रूप में देख रहे हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ईशा भाटिया

संपादन: महेश झा

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