अल कायदा से रिश्तों के चलते मिली सजा | ताना बाना | DW | 19.07.2010
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ताना बाना

अल कायदा से रिश्तों के चलते मिली सजा

आतंकवादी संगठन अल कायदा से रिश्ते रखने का आरोप झेल रहे दो लोगों को जर्मनी की एक अदालत ने जेल भेज दिया है. इनमें एक व्यक्ति तुर्क मूल का है, जबकि दूसरे व्यक्ति के पास जर्मनी और तुर्की की दोहरी नागरिकता है.

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पश्चिम जर्मनी में कोबलेंत्ज की एक अदालत ने ओमेर को छह साल जेल की सजा सुनाई है जबकि सेरमत को ढाई साल जेल में बिताने होंगे. दोनों की उम्र 32 साल है और श्टुटगार्ट के पास एक छोटे से शहर जिंडेलफिन्गन के रहने वाले हैं. ओमेर और सेरमत पर आरोप था कि वे एक आतंकवादी के लिए अंधेरे में देखने में मदद करने वाले चश्मे और पैसा ला रहे थे.

ओमेर और सेरमत कथित रूप से पाकिस्तानी मूल के जर्मन नागरिक अलीम की मदद करने की कोशिश कर रहे थे. जर्मन पुलिस अलीम को अल कायदा के बड़े चरमपंथी के रूप में देखती है और पिछले साल जुलाई में ही उसे आठ साल की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ये दोनों अल कायदा के मंसूबों को आगे बढ़ाने की फिराक में थे.

ओमेर पर तो अफगानिस्तान पाकिस्तान की सीमा पर आतंकवादी शिविर में जाकर ट्रेनिंग का भी आरोप लगा है. ओमेर ने वहां जाकर 2006 में ट्रेनिंग ली. जर्मन सेना अफगानिस्तान में मौजूद है और सुरक्षा एजेंसियों को चिंता है कि इस वजह से जर्मनी को भी चरमपंथी निशाना बना सकते हैं. जर्मनी के 4,700 सैनिक अफगानिस्तान में तैनात है.

मार्च में चार इस्लामी चरमपंथियों को पांच से 12 साल की सजा सुनाई गई. उन पर विस्फोटक रखने और अमेरिकी दूतावास, आम लोगों और सैनिकों को निशाना बनाने की साजिश रचने का आरोप लगा. अमेरिका में 11 सितम्बर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों की साजिश भी जर्मनी के हैम्बुर्ग शहर में रची गई.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: उभ

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