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दुनिया

अल कायदा का गद्दार

दुनिया भर में आतंकवाद का दूसरा नाम अल कायदा है. लेकिन संगठन के अंदर भी ऐसे लोग हैं, जो उसे धोखा देने की कोशिश करते हैं. कैसे निपटा जाता है उससे.

उत्तर अमेरिका के अल कायदा के नेताओं ने अपने उस कर्मचारी को अनुशासित करने की बहुत कोशिश की लेकिन ऐसा नहीं हुआ. पन्ना दर पन्ना उन्होंने जिक्र किया है कि किस तरह इस शख्स ने उनके फोन का जवाब नहीं दिया, अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी, मीटिंग में नहीं पहुंचा या फिर वक्त वक्त पर आदेश मानने से इनकार कर दिया.

इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी बताया है कि किस तरह लंबे समय से वह कोई भी "शानदार" ऑपरेशन करने में नाकाम रहा है.

और इस कर्मचारी ने इसका जवाब भी बेहद पेशेवर अंदाज में दिया. उसने संगठन छोड़ दिया और अपनी अलग संस्था बना डाली. कुछ ही महीनों में उसने जबरदस्त ऑपरेशन किया, जिसमें 101 लोग मारे गए. इस दौरान अल्जीरिया में बीपी के गैस प्लांट में जबरदस्त अपहरण कांड भी था. इसके अलावा नाइजर में फ्रांसीसी प्रतिष्ठानों में बम विस्फोट भी शामिल था. अल कायदा के इस पूर्व कर्मचारी और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी का नाम मुख्तार बिलमुख्तार है.

Algerien Gasfeld Amenas Terror Geiseln Angriff

अल्जीरिया के गैस प्लांट में अपहरण कांड

अलग तेवर वाला बिलमुख्तार

अल कायदा का यह पत्र मीडिया के पास है. इसमें जिक्र किया गया है कि किस तरह बिलमुख्तार सीधे टॉप कमांड के नेतृत्व में काम करना चाहता था. पत्र में पता चलता है कि किस तरह यह व्यक्ति तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ता गया. इसमें अल कायदा के काम काज के बारे में भी पता चलता है.

पेंटागन में अफ्रीकी आतंकविरोधी मामलों के जानकार रुडोल्फ अतल्ला का कहना है कि इस पत्र को देख कर पता लगता है कि अल्जीरिया और नाइजर में क्या कुछ हुआ. पत्र तीन अक्तूबर को लिखा गया. बिलमुख्तार ने इन जगहों पर आतंकवादी घटनाओं की जिम्मेदारी ली है. अतल्ला का कहना है, "वह सीधे अपने बॉस को संदेश दे रहा है कि वह एक जिहादी है और उसकी बॉस से अलग पहचान होनी चाहिए. वह अल कायदा को भी संदेश दे रहा है कि उत्तर में काम करने वाले लोग अक्षम हैं. आप मुझसे सीधे बात कर सकते हैं."

Soldaten Armee Mali

माली में शांति का प्रयास

पेंटागन में एमबीएम

अल्जीरिया के उत्तरी हिस्से में पैदा हुआ बिलमुख्तार 40 की दहाई का है और पेंटागन के अंदर एमबीएम (नाम के पहले अक्षरों) से जाना जाता है. उसने 19 साल की उम्र में अफगानिस्तान का दौरा किया और अपनी जीवनी में लिखा है कि वहां अल कायदा की एक ट्रेनिंग के दौरान अपनी एक आंख खो बैठा. आखिर में दो दशक बाद उसे अल कायदा से अलग ही होना पड़ा.

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