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दुनिया

'अल्लाह सिर्फ मुस्लिमों का'

'इंशा-अल्लाह' और 'माशा-अल्लाह' जैसे शब्दों का इस्तेमाल सिर्फ मुस्लिम समुदाय ही नहीं दूसरे लोग भी करते हैं. लेकिन अगर 'अल्लाह' शब्द के इस्तेमाल में धर्म के आधार पर रोक लग जाए, तो?

मलेशिया की एक अदालत ने एक ईसाई अखबार के खिलाफ फैसला सुनाया है कि वह 'गॉड' की जगह अल्लाह शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकता है. इस फैसले ने ना सिर्फ धार्मिक तनाव को जन्म दिया है बल्कि मुस्लिम बाहुल्य वाले देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. कानून अब अल्लाह शब्द का इस्तेमाल गैरमुस्लिम नहीं कर सकते.

मलेशिया की अपील अदालत कोर्ट में तीन मुस्लिम न्यायाधीशों के इस संयुक्त फैसले ने 2009 में निचली अदालत के फैसले को उलट दिया है. जिसके अनुसार द हेराल्ड अखबार के मलेशियाई संस्करण में भगवान के लिए 'अल्लाह' लिखने की अनुमति दी गई थी. मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद अपांडी अली ने कहा "अल्लाह शब्द का इस्तेमाल ईसाई मान्यताओं का अभिन्न हिस्सा नहीं है. इस शब्द के इस्तेमाल से समुदायों में भ्रम पैदा होने की संभावना है."

राजनीतिक पहलू

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मई में हुए चुनावों के बाद से मलेशिया में धार्मिक तनाव है. इस चुनाव में चीनी अल्पसंख्यकों के बड़े हिस्से ने लंबे समय से सत्ता में जमे गठबंधन का साथ नहीं दिया था. पिछले कुछ महीनों से मलेशियाई प्रधानमंत्री नजीब रजाक पारंपरिक मुस्लिम मलयों का समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं. इस महीने होने वाली सत्ताधारी पार्टी के सम्मेलन से पहले वह अच्छा खासा समर्थन जुटा लेना चाहते हैं. उनकी नई सरकार ने सुरक्षा कनूनों को सख्त करने के अलावा दशक भर से चली आ रही कट्टरपंथी मुस्लिम नीतियों को भी बढ़ावा दिया है. ऐसे में सरकार ने इस बात का साथ दिया है कि 'अल्लाह' शब्द का इस्तेमाल केवल मुसलमानों को ही करना चाहिए.

अदालत के बाहर खड़े करीब दो सौ मुसलमानों ने फैसले का स्वागत किया. 39 साल के जफरिजाल अहमद जाफर ने कहा, "एक मुसलमान होने के नाते अल्लाह शब्द के इस्तेमाल को सुरक्षित करना जिहाद जैसा है. इसको बचाना मेरा फर्ज है."

अल्पसंख्यकों के अधिकार

अखबार की ओर से बहस कर रहे वकीलों की दलील है कि मलेशिया के बोर्नियो द्वीप के ईसाई समुदाय में भगवान के लिए अल्लाह शब्द का इस्तेमाल सैकड़ों सालों से हो रहा है. उन्होंने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे. मलेशिया में हेराल्ड अख्बार के पहले संपादक फादर लॉरेंस एंड्र्यू ने कहा, "राष्ट्र को चाहिए कि वह अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करे. ईश्वर हर धार्मिक समुदाय का अभिन्न हिस्सा है."

इंडोनेशिया और कई अरब देशों के ईसाई बिना झिझक और बिना किसी रोकटोक के 'अल्लाह' शब्द का इस्तेमाल करते हैं. बोर्नियो के गिरजाघरों का कहना है कि वे इस फैसले के बाद भी पहले ही की तरह इस शब्द का इस्तेमाल करते रहेंगे. 2009 में गृह मंत्री के लिए फैसले की न्यायिक समीक्षा के बाद फैसला अखबार के हक में चला गया. इसके बाद संघीय सरकार ने अपील अदालत में इसे चुनौती दी जिस पर सुनवाई के बाद पिछले फैसले को उलट दिया गया है. अपील अदालत ने कहा है कि इससे प्रकाशक के संवैधानिक अधिकार का हनन नहीं होता है.

मलेशिया की 2.8 करोड़ आबादी में से 60 फीसदी पारंपरिक मुस्लिम और एक चौथाई से ज्यादा चीनी हैं. इनके साथ ही भारतीयों की भी अल्पसंख्यकों में बड़ी तादाद है, जबकि ईसाई कुल 9 फीसदी है.

एसएफ/एनआर (रॉयटर्स)

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