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विज्ञान

अलेक्सांडर गैर्स्ट की अंतरिक्ष यात्रा

जर्मन अंतरिक्ष यात्री अलेक्सांडर गैर्स्ट बुधवार शाम को अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन की ओर रवाना होंगे. छह महीने वो अंतरिक्ष में रहेंगे. हमने जायजा लिया उनकी ट्रिप की तैयारियों का.

मामला धीरे धीरे गंभीर होता जा रहा है. सिर्फ कुछ ही घंटों की बात है. कजाकिस्तान के बाइकोनूर में तैयारी पूरी हो चुकी है. बुधवार 28 मई के दिन शाम को रॉकेट प्रक्षेपित किया जाएगा. दो लाख साठ हजार हॉर्सपावर के साथ अंतरिक्ष यात्रियों को आसमान में भेजा जाएगा, जिसमें 300 टन ईंधन लगेगा. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन आईएसएस पहुंचने में उन्हें छह घंटे का समय लगेगा. गैर्स्ट को यूरोपीय स्पेस एजेंसी में जब चुना गया तब से अब तक साढ़े चाल साल गुजर चुके हैं.

उन्हें ईएसए में 3000 घंटे की ट्रेनिंग दी गई. इसके बाद उनकी मेडिकल परीक्षा हुई और वे कई जनसंपर्क कार्यक्रमों में भी शामिल हुए. इसके अलावा और 3000 घंटे उन्होंने अमेरिका, कनाडा, रूस और जापान की प्रयोगशालाओं में गुजारे. इस दौरान गैर्स्ट ने चार लाख किलोमीटर की यात्रा की. लेकिन असली यात्रा का मजा ही कुछ और है जैसा कि गैर्स्ट ने अपने ब्लॉग में लिखा, "आईएसएस में बोर्डिंग, पिछले चार साल में मैंने जितनी यात्रा की उसकी दोगनी दूरी हम तय करेंगे, रोजाना. अंतरिक्ष के 24 घंटों में हम 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देखेंगे. मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा."

रूस कह चुका है कि वह आईएसएस के साथ अपना सहयोग योजना से पहले खत्म कर रहा है. लेकिन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव के मद्देनजर ये समाचार अनपेक्षित नहीं था. बिना रूसी सोयूज रॉकेटों के अमेरिका अंतरिक्ष में जा ही नहीं सकते.

अंतरिक्ष यान में 2,600 किलो सामान भी जाएगा, जिसमें खाना, ऑक्सीजन, उपकरण और ईंधन होता है. इतना ही नहीं बहुत ध्यान रखना पड़ता है कि कार्गो एरिया में किसी तरह का बैक्टीरिया या वायरस न जाए. अंतरिक्ष में संक्रमण से बचना बहुत जरूरी होता है क्योंकि वहां इंसान की प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है.

अंतरिक्ष में

धरती से करीब 200 किलोमीटर ऊपर वातावरण की वो सतह शुरू होती है जहां कोई हवा नहीं होती, निर्वात होता. यानि घुप अंधेरा क्योंकि बिना हवा के आवाज नहीं जा सकती. इंसान के लिए भी ये स्थिति कोई अच्छी नहीं. निर्वात में सांस ली ही नहीं जा सकती और सुरक्षा नहीं हो तो इंसानी खून उबलने लग सकता है. इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों को खास सूट पहनाया जाता है, जिसमें अपना दबाव होता है. उनके सूट में 13 परतें होती हैं. उपकरणों सहित इसका वजन 100 किलो होता है. हालांकि इस वजन का कोई मतलब नहीं क्योंकि वहां गुरुत्वाकर्षण ही नहीं होता.

ब्लू डॉट मिशन

अलेक्सांडर गैर्स्ट के मिशन का नाम ब्लू डॉट है. क्योंकि 6.4 अरब किलोमीटर की ऊंचाई से धरती सिर्फ एक हल्के नीले बिंदु की तरह दिखाई देती है. इस मिशन को "ब्लू डॉट" नाम इसलिए दिया गया है कि गैर्स्ट और उनके साथी धरती के फायदे के लिए अंतरिक्ष में शोध करेंगे. मिशन का लक्ष्य है, "भविष्य को आकार देना."

इंजीनियर गैर्स्ट इस यात्रा के दौरान ओस्टियोपोरोसिस, नई मिश्र धातुओं को खोजने और ईंधन बचाने पर शोध करेंगे. लेकिन इसी के साथ वह धरती के नजारे का भी आनंद लेना चाहते हैं. इस आईएसएस अभियान 40 और 41 के दौरान कुल 162 प्रयोग किए जाएंगे. इनमें कुछ नए हैं और कुछ पुराने को आगे बढ़ाया जाएगा.

रिपोर्टः टोबियास ओएलेमायर/एएम

संपादनः ए जमाल

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