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विज्ञान

'अलीबाबा' की कामयाबी का राज

अपार्टमेंट के एक छोटे से कमरे से आज उसने अपनी ईकॉमर्स कंपनी को दुनिया भर में मशहूर कर दिया है. 'अलीबाबा' के संस्थापक मा युन को कोई जाली कहता है तो कोई ट्रेंड स्थापित करने वाला. हालांकि वह खुद को गणित में कच्चा मानते हैं.

चीन की सबसे बड़ी ईकॉमर्स कंपनी अलीबाबा दुनिया भर में नाम कमा रही है. मा युन 'जैक मा' के नाम से भी जाने जाते हैं. वह किसी बने बनाए नियमों के आधार पर काम नहीं करते, बस यह तय करते हैं कि जो भी करें उससे मुनाफा हो. उन्होंने बताया, "मैं गणित में अच्छा नहीं हूं, कभी प्रबंधन की पढ़ाई नहीं की और आज भी अकाउंट्स की रिपोर्ट नहीं पढ़ सकता हूं." उन्होंने हाल में बताया कि इन तमाम दिक्कतों के बावजूद वह अलीबाबा को अपने कमरे से शुरू करके चीन की एक कामयाब ईकॉमर्स कंपनी बनाने में कैसे कामयाब रहे.

चीन में कई लोग उन्हें नियम तोड़ने के लिए नापसंद भी करते हैं. बिल गेट्स या स्टीव जॉब्स की तरह मा के पास कंप्यूटर साइंस की भी कोई पृष्ठभूमि नहीं रही. बचपन में कभी उन्होंने कंप्यूटर इस्तेमाल नहीं किया. गणित के पेपर में एक बार उन्हें 120 में से केवल एक अंक मिला, ऐसे में उनकी कामयाबी की कहानी और भी हैरान करती है. 1980 में वह अपने शहर में एक स्कूल टीचर की नौकरी करने लगे. तीन साल बाद उन्होंने इस नौकरी को छोड़ अनुवाद करने वाली एक कंपनी खोली.

मिस्टर इंटरनेट

1994 में जब वह अपने बिजनेस के सिलसिले में अमेरिका गए हुए थे, तो वहां इंटरनेट देख कर हैरान रह गए. उन्हें यह बात करामाती लगी कि कैसे घर बैठे लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से इंटरनेट के जरिए जुड़ सकते हैं. वहां से लौटने के बाद उन्होंने 'चाइना पेज' लॉन्च किया. यह देश की पहली ऑनलाइन डायरेक्टरी थी. इसकी कामयाबी से मा चीन में 'मिस्टर इंटरनेट' के नाम से मशहूर हो गए.

लेकिन आगे रास्ता आसान नहीं था. चीन में इंटरनेट लाने के लिए यह जरूरी था कि वह सरकार का ध्यान इस ओर खींचें. यह इंटरनेट का शुरुआती चरण था और बहुत ही कम घरों में कंप्यूटर देखने को मिलता था. लगातार कई नाकामियों के बाद मा ने चाइना पेज बंद कर दिया और अपने नए प्रोजेक्ट अलीबाबा की तैयारी में लग गए.

जापान की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी सॉफ्टबैंक से मा कर्ज लेने में कामयाब हुए. यह कंपनी चीन के आईटी सेक्टर में निवेश करती है. अलीबाबा में शुरुआती निवेश करने वालों में से एक वू यिंग ने वेबसाइट पर लिखा, "एक पुरानी सी जैकेट और हाथ में एक कागज पकड़े वह हमारे पास आया था." कुल छह मिनट में उसने निवेशकों को इतना यकीन दिला दिया कि उन्हें दो करोड़ अमेरिकी डॉलर का कर्ज मिल गया.

इसके बाद कंपनी ने कई विवाद भी झेले. 2011 में अलीबाबा को झटका लगा जब कंपनी को कथित रूप से नकली सामान बेचते पाया गया. इसके बाद उन्होंने अपने दो सहायकों को नौकरी से निकाल दिया. लोगों ने उन पर चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी से मिला होने के आरोप भी लगाए और जांच की मांग की. लेकिन आलोचनाओं की परवाह किए बिना मा आगे बढ़ते रहे.

नए कदम

तमाम विवादों के बावजूद मा के समर्थक उन्हें एक ट्रेंडसेटर के रूप में देखते हैं. चीन की सोशल नेटवर्किंग साइट वीबो पर उन्हें 1.5 करोड़ फॉलो करने वाले हैं. उन पर लिखी गई एक किताब 'मा-इज्म' के मुताबिक, "एक नया धर्म आ चुका है."

मई 2013 में मा ने अलीबाबा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद छोड़ दिया. लेकिन इससे न ही उनकी शोहरत में कोई कमी आई न कंपनी के इर्द गिर्द मंडराते विवादों में. मा ने इशारा दिया कि आगे वह ऑनलाइन डाटा टेक्नोलॉजी की दिशा में काम करना चाहते हैं. हाल में त्सिंगुआ यूनिवर्सिटी में एक लेक्चर के दौरान उन्होंने कहा, "दुनिया अब आईटी से डीटी की तरफ जा रही है."

रिपोर्ट: चेन शियाओचेन/एसएफ

संपादन: आभा मोंढे

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