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दुनिया

अलीगढ़ बनेगा 'ग्रीन कैंपस'

अगर 30,000 छात्रों वाले कैंपस में गाड़ियां नहीं, सिर्फ साइकिलें हों और बिजली के लिए सौर ऊर्जा का भरोसा हो, तो सोचिए पर्यावरण को कितना फायदा होगा? अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भारत का पहला 'ग्रीन कैंपस' बनने की राह पर है.

138 साल के इतिहास वाला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) पिछले कुछ सालों से किसी न किसी कारण से विवादों में रहा है. लेकिन नए वाइस चांसलर भारतीय सेना के रिटायर्ड जनरल जमीरुद्दीन शाह न सिर्फ सौर ऊर्जा से यूनिवर्सिटी कैंपस में बिजली लाना चाहते हैं, बल्कि उनके नए कार्यक्रम के तहत परिसर में मोटरबाइक का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा. छात्रों को साइकिल चलानी होगी.

शान में पैबंद

जनरल शाह ने बताया कि जब उन्होंने यह प्रस्ताव छात्रों के सामने रखा तो कई ने दलील दी कि इससे उनकी शान कम होती है. तब उन्होंने तय किया कि अगर यह शान के खिलाफ बात है तो शुरुआत वह खुद करेंगे, "मैं सेना से आया था लेकिन मैंने छात्रों के साथ सैनिकों वाले तौर तरीके नहीं आजमाए. मुझे पता है इनको बात समझाने का तरीका कुछ और होना चाहिए, बात उनके दिल को छूनी चाहिए."

विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर कई छात्रों ने नए कार्यक्रम पर आपत्ति जताई. उनका सवाल है कि ऐसे नियम सिर्फ हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए ही क्यों? इसके जवाब में जनरल शाह कहते हैं कि उन्होंने इस बात का भी ख्याल रखा है. हॉस्टल में नहीं रहने वाले छात्र जो शहर से अपनी मोटरसाइकिलों पर आते हैं वे भी कैंपस के एक निर्धारित क्षेत्र तक ही मोटरसाइकिल ला सकते हैं. उसके आगे उन्हें पैदल या साइकिल से चलना होगा.

शाह का कहना है, "हाल में मैं अमेरिका गया था जहां मैं इस बात से काफी प्रभावित हुआ कि न तो छात्र और ना ही पढ़ाने वालों को इस बात से शर्म महसूस होती है कि वे साइकिल पर हैं. यूरोप में भी आपको ऐसा देखने को मिलेगा. तो हम थोड़ी सी कोशिश करके अपने पर्यावरण के साथ साथ आर्थिक हितों का खयाल क्यों नहीं रख सकते."

हालांकि छात्रों के लिए इस योजना को एकदम गले उतारना आसान नहीं. एएमयू में इंजीनियरिंग कर रहे अमीन अहमद का डीडब्ल्यू से कहना है कि हर बात पर भारत की तुलना अमेरिका और यूरोप से नहीं की जा सकती, "अमेरिका और यूरोप की ज्यादातर यूनिवर्सिटियां ठंडी जगहों पर बसी हैं. मैं खुद साइकिल चलाना पसंद करता हूं लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूं कि 15-20 डिग्री में साइकिल चलाने की जगह अगर आपको 45 डिग्री में साइकिल चलानी पड़े, तो बहुत तकलीफ होती है."

अहमद कहते हैं कि एएमयू वैसे भी एक विशाल कैंपस है और छात्र मोटरसाइकिल से आसानी से एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जा सकते हैं, इससे उनका "समय और ऊर्जा" बचेगी. अलीगढ़ का परिसर करीब 1100 एकड़ में फैला है और क्षेत्रफल के हिसाब से यह भारत की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटियों में गिना जाता है.

बिजली पर करोड़ों की बचत

एएमयू के वाइस चांसलर ने बताया कि जल्द ही अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सभी शैक्षिक विभागों और हॉस्टलों में बिजली का स्रोत सौर ऊर्जा होगी. इस पर करीब 20 करोड़ खर्च होगा. लेकिन इस बदलाव के बाद तीन से चार साल के भीतर ही इसकी लागत वसूल हो जाएगी और उसके आगे हर साल करोड़ों रुपयों की बचत होगी.

भारत और दुनिया के अलग अलग कोनों से आए करीब 28,000 छात्रों के लिए एएमयू में हॉस्टलों के 19 हॉल हैं. सभी हॉस्टलों में खाना बनाने के लिए गैस की जगह सोलर चूल्हे लगेंगे. इससे न सिर्फ आर्थिक बचत होगी बल्कि गैस के इस्तेमाल से भी बचा जा सकेगा.

रिपोर्ट: समरा फातिमा

संपादन: अनवर जे अशरफ

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