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फीडबैक

अलविदा 2010 और आपके संदेश

आने वाले साल का स्वागत और जाते हुए साल को अलविदा. इस मौके पर डीडब्ल्यू हिंदी वेबसाइट पर पेश सामग्री और कार्यक्रम आप सब को बहुत पसंद आए हैं. आपके कीमती संदेशों में हमें क्या कुछ मिला, आइए पढ़ते हैं.

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डॉयचे वेले हिंदी की वेबसाइट में वर्ष 2010 की प्रमुख घटनाओं और उपलब्धियों के विषय में 'रंग बिरंगा 2010', 'कैसा रहा 2010', '2010 सेहत की चुनौतियां' आदि आर्टिकल पढ़ने को मिले, जो काफी रोचक और सूचनाप्रद लगे. समाचारों और जानकारियों का चयन सटीक और गागर में सागर की तरह हैं. वर्ष 2010 की प्रमुख घटनाओं में विकिलीक्स के दस्तावेजों का उजागर महत्वपूर्ण है, जिसने अमेरिका सहित पूरे विश्व को स्तब्ध कर दिया. लेकिन अगर सिर्फ भारत की बात करें, तो भारत के लिए वर्ष 2010 घोटाला वर्ष साबित हुआ. इस वर्ष भारत में भ्रष्टाचार के बड़े बड़े खेल और खिलाड़ी देखने को मिले. हम सबकी यही आशा और शुभकामना है कि बीते वर्ष के घोटालों और भ्रष्टाचार का नंगा नाच नए वर्ष में न देखना पडे.

चुन्नीलाल कैवर्त, ग्रीन पीस डी - एक्स क्लब, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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अंतरा में यूक्रेन से जर्मनी में बसी और शॉपिंग असिस्टेंट का अनोखा काम करने वाली आन्ना क्रुकोवा के काम के बारे में जानकारी काफी पसंद आई. सचमुच दूसरों को गिफ्ट देने के लिए काफी सोचना पड़ता है और इस पर शॉपिंग असिस्टेंट काफी मददगार साबित हो सकती हैं.

हैलो ज़िन्दगी में 15 साल से मॉडलिंग कर रही और मिस अर्थ खिताब जीतने वाली निकोल फरिया की जानकारी और उनके आगे के इरादों पर डाली गई नजर काफी रोमांचित लगी. अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतियोगियों को हराकर खिताब जितना कोई सामान्य बात नहीं है.

वेस्ट वॉच में साल 2010 की मुख्य सुर्ख़ियों पर आधारित कार्यक्रम से साल भर की भूली हुई यादें ताज़ा हो गईं. देखते देखते 2010 कब अपने मुकाम पर पंहुच गया, पता ही नहीं चला. डीडब्ल्यू ने भी हमारा खूब साथ निभाया जिसके लिए डीडब्ल्यू का शुक्रिया.

Nodar Kumaritaschwili Flash-Galerie

तेजी से फिसलता 2010

संदीप और सविता जावले, मार्कोनी डी एक्स क्लब , परली वैजनाथ (महाराष्ट्र)

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रेत में लुप्त होता रेगिस्तान का जहाज जसविंदर सहगल की यह रिपोर्ट बेहद सटीक लगी. मरुधरा का यह प्रतीक ऊंट बदलते समय की मार झेल रहा है. आधुनिक कृषि यंत्रों ने भी ऊंट की प्रजाति को काफी हद तक प्रभावित किया है. परंपरागत ऊंट- गधों का स्थान अब ट्रैक्टर-ट्रोली ने ले लिया है. इस भौतिकवादी युग मैं ऊंट पालना अब फायदे का सौदा नहीं रहा. साथ कुछ अज्ञात बीमारियों की मार भी ऊंट की नस्ल को प्रभावित कर रही है. कुल मिलकर रेगिस्तान का जहाज़ अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. सरकारी पहल और जनजागृति ही इनको बच्चा सकती है. इस समस्या की ओर ध्यान खींचने के लिए डीडब्ल्यू का प्रयास प्रशंसनीय है.

माधव शर्मा , नागौर (राजस्थान)

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मालिकों के क्रूर तौर तरीके और पिसती महिलाएं. यह बहुत शर्मनाक बात है कि लेबानान में महिला कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है. सभी विकसित देश भारत जैसे देशों पर आरोप लगाते हैं लेकिन उन्हें यह सोचना होगा कि यह समस्या केवल भारत में ही नहीं है बल्कि यह पूरे विश्व की समस्या है. मेरी राय में संयुक्त राष्ट्र को इसके खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए.

बच्चों की नजर को कमजोर करते वीडियो गेम. यह एक वैश्विक समस्या है क्योंकि अब कंप्यूटर हमारे जीवन (मानव) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है और इस दृष्टि में समस्या को तभी कम किया जा सकता जब माता पिता स्वयं इस ओर ध्यान दे और अपने बच्चों की रुचि किताबों की और बढ़ाए.

कपिल गुप्ता, ईमेल द्वारा

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शांति डीएक्स क्लब , बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) से दान सिंह वर्मा ने दोस्ती के नाम कुछ अद्भुत पंक्तियां लिखी हैं :

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रहने का,

बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में.

जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की,

देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में.

यह तो बहाना है कि मिल नहीं पाए दोस्तों से आज,

दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में.

नाम की तो जरूरत ही नहीं पड़ती इस रिश्ते मे कभी,

पूछे नाम अपना और दोस्तों का बताते हैं, दोस्ती में.

कौन कहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी,

दूर रहकर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में.

सिर्फ़ भ्रम है कि दोस्त होते है अलग-अलग,

दर्द हो इनको और आंसू उनके आते हैं, दोस्ती में.

माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिए "अभी"

पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में.

और एक ही दवा है गम की दुनिया में क्योंकि,

भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती.

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रहने का,

बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में.

जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की,

देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते.

संकलनः विनोद चढ्डा

संपादनः ए कुमार