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जर्मन चुनाव

अरुंधती ने माओवादियों को देशभक्त बताया

माओवादियों को महिमा मंडित करते हुए विवादास्पद लेखिका अरुंधती रॉय ने उन्हें एक तरह से देशभक्त बताया है. उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर संविधान और अनुसूचित इलाकों तक पंचायत विस्तार कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया.

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सरकार पर फिर निशाना साधा

भुवनेश्वर में रॉय ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, "वे (माओवादी) एक तरह से देशभक्त हैं. लेकिन यहां तो देशभक्ति ही बहुत पेचीदा है. फिलहाल लोग इस देश को बिखर जाने से रोकने के लिए लड़ रहे हैं." उन्होंने यह बात वामपंथी विचारधारा से प्रेरित एक पत्रिका की तरफ से कराए गए सेमिनार के बाद कही जिसका विषय था व्यावसायिक हितों के लिए लोगों पर थोपे गए युद्ध का सांस्कृति प्रतिरोध.

एक सवाल के जवाब में लेखिका से सामाजिक कार्यकर्ता बनीं अरुंधती ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सिर्फ माओवादी क्रांति से समस्याएं सुलझ जाएंगी. वह कहती हैं, "हल तरह के लोगों का एक नया तरह का गठजोड़ बनेगा." कश्मीर पर विवादास्पद बयान देने के लिए आरएसएस और एबीवीपी जैसे संगठनों ने सेमिनार के आयोजन स्थल के बाहर अरुंधती के खिलाफ नारे लगाए.

बुकर पुरस्कार जीत चुकीं अरुंधती ने कहा कि अनुसूचित इलाकों तक पंचायत विस्तार कानून को आदिवासी और इन इलाकों मे रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री कह रहे हैं कि जंगलों की जमीन अन्य उद्देश्यों के लिए चाहिए. अरुंधती के मुताबिक, "उन्होंने (प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने) यह कानून बनाया और वे ही इसका उल्लंघन कर रहे हैं." अरुंधती ने कहा कि स्थानीय लोगों और आदिवासियों का अपनी जमीन, जल और जंगल पर पूरा हक है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के अलावा पुलिस, सीआरपीएफ और बीएसएफ भी संविधान में दिए गए कानूनों को तोड़ रहे हैं. अरुंधती ने केंद्र में आने वाली एक के बाद एक सरकारों पर जम्मू कश्मीर, पंजाब और पूर्वोत्तर के राज्यों में अकसर बल प्रयोग का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बल प्रयोग सरकार करती है, न कि नक्सली.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एमजी

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