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दुनिया

अरब शेखों को "पैकेज डील" में बेची जाती हैं बच्चियां

बिरयानी और चार मिनार के लिए मशहूर दक्षिण भारत के हैदराबाद शहर के दामन पर हाल के साल कुछ दाग भी लगे हैं. यह शहर अरब शेखों से कम उम्र की बच्चियों की 'टाइमपास शादी' कराने के मामलों की वजह से लगातार चर्चा में है.

अरब शेखों को लड़कियां मुहैया कराने के इस कारोबार में हाजी खान जैसे लोगों की चांदी होती है. अधेड़ से लेकर बुजुर्ग उम्र के किसी अरब शेख से एक नाबालिग की शादी का मतलब हाजी खान के लिए था जेब में दस हजार रुपये आना.

हाजी खान दो तरह की डील कराते थे. एक है 'पक्का', जिसमें लड़की शादी करके अपने पति के साथ उसके देश चली जाती है और दूसरी हैं 'टाइम पास मैरिज' जो सिर्फ तब तक चलती है जब तक वह व्यक्ति भारत में है. 

अब पुलिस के मुखबिर बन चुके हाजी खान ने बताया, "हम हर अरब शेख के लिए होटल में 20 से 30 लड़कियों को कतार में खड़ा कर देते थे, जिनमें से वह किसी एक को चुनता था. खारिज की गयी लड़कियों को वे 200-200 रुपये दे कर घर भेज देते थे."

खान ने बताया, "वे जिस लड़की से शादी करते थे, उसके लिए पुराने, इस्तेमाल किये हुए दुल्हन के कपड़े, साबुन और नाइटगाउन लेकर आते थे. ज्यादातर शादियां टाइम पास होती थीं."

हाल ही में पुलिस ने हैदराबाद में ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया जो ओमान और दुबई जैसे खाड़ी के इलाकों से आये अमीर लोगों की "शादी" किशोर लड़कियों से कराता था.

शादी के ही समय ये अरब लोग बाद की तारीख वाले तलाक के कागजों पर दस्तख्त करते थे, जो उनके भारत से चले जाने पर लड़कियों को दे दिये जाते हैं. इस तरह की शादियों को कराने वाले काजी अकसर लड़की की उम्र गलत बताते हैं ताकि उसे व्यस्क मान लिया जाए. हैदराबाद में ऐसी शादियां कराने वाले एक काजी को भी गिरफ्तार किया गया है.

इस मामले की जांच करने वाले हैदराबाद पुलिस के डिप्टी कमिश्नर वी सत्यानारायण कहते हैं, "ज्यादातर लड़कियों को पता ही नहीं होता कि उन्हें शादी के 15-20 दिन बाद छोड़ दिया जाएगा. ये लोग टूरिस्ट वीजा पर आते हैं, शादी करते हैं और कुछ दिनों के भीतर वापस अपने देश चले जाते हैं."

पुलिस का कहना है कि जिन लड़कियों को उनके अरब पति अपने देश ले जाते हैं, उन्हें बाद में नौकरानी या फिर यौन गुलाम बनाकर रखा जाता है. पुलिस के अभियान में जिन 14 लड़कियों को बचाया गया उन सभी की उम्र 18 साल से कम थी. पुलिस का कहना है कि जिन दलालों को पकड़ा गया उनमें से आधी महिला थीं और वे खुद भी कभी ना कभी इस आपराधिक कुचक्र का शिकार रही हैं.

सत्यानारायण कहते हैं, "हैदराबाद के इस इलाके में लंबे समय से कॉन्ट्रैक्ट शादियां होती रही हैं, लेकिन अब इसने एक संगठित अंतरराष्ट्रीय व्यापार का रूप ले लिया है, जिसमें भारत के अलग अलग शहरों के एजेंट और काजियों के अलावा खाड़ी देशों के लोग भी शामिल हैं."

इन लोगों को लड़कियां आसानी से मिल जाती हैं. ये शादियां अकसर ईद के बाद होती हैं जिसे एजेंट "सीजन टाइम" कहते हैं. इस दौरान खाड़ी देशों से टूरिस्ट हैदराबाद आते हैं.

खाड़ी देशों से हैदराबाद का नाता सदियों पुराना है. 19वीं सदी में हैदराबाद के निजाम ने आज के सऊदी अरब और ओमान से सैनिकों को अपनी फौज में भर्ती किया था. उनके कुछ वंशज अब भी इस शहर में रहते हैं. पुरानी पीढ़ी के लोग अरब लोंगों से हैदराबादी लड़कियों की "अच्छी शादियों" को याद करते हैं जो 1970 और 1980 के दशक में अपने परिजनों से मिलने भारत आया करते थे.

लेकिन हाल के सालों में इस चलन ने एक कारोबार का रूप ले लिया है. नाम ना जाहिर करने की शर्त पर एक लड़की ने बताया, "मैं 14 साल की थी और हमारे एक पड़ोसी ने बताया कि एक अमीर अरब लड़का अपने लिए दुल्हन तलाश कर रहा है. हम उससे मिलने गये. लेकिन वह लड़का नहीं था. उसकी उम्र 62 साल थी."

"दलाल ने मुझे भरोसा दिलाया कि अगर मैं उससे शादी करती हूं तो मेरी जिंदगी ही बदल जाएगी. मुझे वादा किया गया कि मुझे सोना और दौलत मिलेगी और मेरे माता पिता के लिए घर. मैंने उसका यकीन कर लिया."

लड़की की उस शेख से तुरत फुरत शादी कर दी गयी. लड़की की मां को 30 हजार रुपये दिये गये. शेख ने काजी और एजेंट को भी 50 हजार रुपये दिये. पांच दिन में यह उस व्यक्ति की ऐसी दूसरी शादी थी.

हैदराबाद में जिला बाल संरक्षण यूनिट से जुड़ी राफिया बानो कहती हैं, "जब हमने उस लड़की को बचाया तो वह एक होटल में उस आदमी के साथ एक दिन बिता चुकी थी. उसकी पहली पत्नी को हम बचा चुके थे. वह भी एक किशोरी ही थी."

लेकिन सरकारी आंकड़ों में इस समस्या को बहुत कम करके आंका जाता है. राफिया बानो के कार्यालय ने बीत तीन वर्षों में इस तरह के सिर्फ सात मामले दर्ज किये हैं. वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस का कहना है कि शादी की आड़ में एक सेक्स टूरिज्म इंडस्ट्री फल फूल रही है.

थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के साथ इंटरव्यू में एजेंट, काजी और पुलिस ने बताया कि लड़कियों को आम तौर पर 30 हजार रुपये या उससे ज्यादा की पैकेज डील ऑफर की जाती है. रकम आम तौर पर शादी की अवधि से तय होती है. इस पैकेज में शादी के कागज तैयार करना भी शामिल होता है. पुलिस ने हैदराबाद और मुंबई में गिरफ्तार काजियों के दफ्तरों से निकाहनामों और तलाक के खाली दस्तावेज बरामद किये हैं. हैदराबाद में काजियों की एक चौथी पीढी के सदस्य कादिर अली कहते हैं, "वे खाड़ी देशों के अमीर लोग हैं और वे जानते हैं कि हैदराबाद में लोग गरीब हैं और लड़कियां उपलब्ध हैं. चूंकि शादी से बाहर वे किसी लड़की को छू नहीं सकते, इसलिए वे उससे शादी कर लेते हैं और उसके साथ ही तलाक के खाली दस्तवेजों पर भी हस्ताक्षर कर देते हैं. वे अपनी हवस के लिए इस्लाम का नाम खराब कर रहे हैं."

15 साल की तबस्सुम को काम में अपनी मां का हाथ बंटाने के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी. उसकी मां चूड़ियों पर चमकने वाले नग लगाती है जिन्हें चार मीनार के पास लगने वाले बाजार में टूरिस्ट खूब खरीदते हैं. उसकी मां जरीना ने जब अपनी बेटी की शादी ओमान के एक शेख से करने का फैसला किया तो उन्हें इसमें कुछ गलत नहीं लगा. वह बताती हैं, "हम गरीब लोग हैं और मैंने सुना था कि ऐसे लड़कियों की शादी होती और उनकी जिंदगी बेहतर हो जाती है." लेकिन तबस्सुम वहां से भाग गयी और शादी रद्द हो गयी.

इस तरह की कॉन्ट्रैक्ट शादी की शिकार बनने वाली लड़कियों के लिए काम करने वाली संस्था शाहीन से जुड़ी जमीला निशात कहती हैं, "यह एक कारोबार है. एक लड़की बिकती है तो इससे उसके परिवार के कई लोगों का पेट भरता है."

कभी एजेंट रहे हाजी खान इस कारोबार के दोनों पहलुओं से वाकिफ हैं. वह कहते हैं, "पिछले साल एक महीने में मैंने 50 हजार रुपये कमाये थे. अच्छा पैसा मिलता है. लेकिन दुख की बात यह है कि लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है."

हाजी खान को सब कुछ पता है. लेकिन उनकी अपनी पत्नी भी इस तरह की कॉन्ट्रैक्ट मैरिज की शिकार रही है. तीन साल पहले एक लाख रुपये चुका कर हाजी खान ने अपनी पत्नी को छुड़वाया था. फिर भी, हाल में पुलिस का मुखबिर बनने से पहले तक हाजी खान अरब शेखों के लिए लड़कियों का इंतजाम करने में लगे रहते थे. वह कहते हैं, "यह खेल है जो हम पैसे के लिए खेलते हैं."

एके/एनआर (रॉयटर्स)

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