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दुनिया

अरब देश करेंगे आईएस पर हमला

अरब के 10 देशों ने कहा है कि वे सीरिया और इराक में आईएस लड़ाकों पर अमेरिकी कार्रवाई का साथ देंगे. जबकि ब्रिटेन और जर्मनी ने कहा है कि वह सीरिया पर हवाई हमलों में शामिल नहीं होंगे.

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने अरब देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की. इसके बाद अरब देशों ने अमेरिकी हमले में समर्थन का एलान किया. सऊदी अरब भी अमेरिका का साथ देगा. उधर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर उनका देश भी हमले में साथ दे सकता है. अनुमान है कि सीरिया और इराक में 20,000 से 31,500 के आसपास आईएस लड़ाके हैं. पहले माना जा रहा था कि इनकी संख्या सिर्फ 10,000 है.

ब्रिटेन जर्मनी साथ नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने घोषणा की थी कि इराकी सेना की मदद के लिए और 475 सैनिक वहां भेजेंगे. लेकिन उन्होंने जोर दिया कि यह अभियान इराक और अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई का दोहराव नहीं होगा. ओबामा की इस्लामिक स्टेट (आईएस) के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई का विस्तार करने की योजना पर हालांकि ब्रिटेन और जर्मनी ने साथ नहीं देने का इरादा किया है. ब्रिटेन के नए विदेश मंत्री फिलिप हैमंड के मुताबिक, "ब्रिटेन सीरिया में किसी हवाई हमले में शामिल नहीं होगा." जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर के साथ बातचीत के बाद उन्होंने ये बयान दिया. पिछले साल भी ब्रिटेन की संसद ने सीरिया पर हवाई हमलों में शामिल नहीं होने का फैसला किया था.

हालांकि ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने यह भी साफ किया कि उनका देश, "अमेरिकी नेतृत्व वाली योजना को ध्यान से देखेगा और विचार करेगा कि यूके कैसे योजना में भागीदार हो सकता है, इस समय किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता."

वैसे तो जर्मनी ने इराक में आईएस से लड़ने वाली कुर्द सेना को हथियार भेजे हैं लेकिन विदेश मंत्री श्टाइनमायर ने हवाई हमले में शामिल होने के विचार को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा, "न तो हमें इस बारे में पूछा गया है और ना ही हम ऐसा करेंगे."

सीरियाई सरकार का विरोध

उधर सीरिया की सरकार ने आईएस लड़ाकों के खिलाफ सीरियाई सीमा में अमेरिकी सेना की कार्रवाई का विरोध किया है. सीरिया के राष्ट्रीय समन्वय मंत्री अली हैदर ने कहा, "सीरियाई सरकार की सहमति के बिना ऐसी कोई भी कार्रवाई सीरिया पर हमला होगी." उनका कहना है कि देश में किसी भी बाहरी सैनिक या असैनिक कार्रवाई के लिए सीरिया की सहमति जरूरी है.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के पक्के सहयोगी माने जाने वाले रूस ने भी अमेरिकी नीति की आलोचना की है और कहा कि यह सीधे सीधे अंतरराष्ट्रीय कानून का हनन होगा.

रूस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अलेक्सांडर लुकाशेविच ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के फैसले के बिना इस तरह का कदम आक्रामक है और अंतरराष्ट्रीय कानून का अशिष्ट हनन है."

सीरिया के विपक्ष ने हालांकि ओबामा के फैसले को सही ठहराया है और अपील की है कि वह सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार के खिलाफ कार्रवाई करे. इराक की सरकार ने भी अमेरिकी नीति का स्वागत किया है. अभी ये प्रस्ताव अमेरिकी संसद यानि कांग्रेस में रखा जाना है.

एएम/एजेए (रॉयटर्स, एएफपी)

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