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जर्मन चुनाव

अयोध्या फैसले पर रोक खत्म

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले में मिल्कियत के सवाल पर हाई कोर्ट के फैसले पर रोक को हटा दिया है. अब इलाहाबाद हाई कोर्ट गुरुवार को अपना फैसला सुनाएगा.

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया के नेतृत्व वाली तीन जजों की बेंच के सामने अटॉर्नी जनरल जी वाहनवती ने कहा कि इस विवाद का सबसे अच्छा समाधान यही होगा कि इसे आपसी सहमति से हल कर लिया जाए, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो अनिश्चितता को जारी नहीं रहने दिया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला टालने की पूर्व नौकरशाह रमेश चंद त्रिपाठी की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह वक्त के खिलाफ दौड़ रहे हैं. बेंच के एक जज जस्टिस आफताब आलम ने कहा, "आप समय के खिलाफ दौड़ रहे हैं क्योंकि आप बहुत देर से जागे हैं. आपको यह बातें तब कहनी चाहिए थीं जब मामला हाई कोर्ट में था." अदालत ने यह बात त्रिपाठी के वकील मुकुल रोहतगी की इस दलील के जवाब में कही कि विवाद को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए. कानूनी कार्यवाही के दौरान रोहतगी ने कहा कि मध्यस्थता कानून का हिस्सा नहीं है. जस्टिस आफताब आलम ने कहा कि मामले से जुड़े सभी पक्ष इस बात पर तो सहमत हैं ही कि हाई कोर्ट का फैसला आना चाहिए.

23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर एक हफ्ते के लिए रोक लगा दी थी. पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला 24 सितंबर को आना था. त्रिपाठी 60 साल से चल रहे इस विवाद का अदालत से बाहर बातचीत के जरिए हल चाहते हैं. लेकिन मामले से जुड़े दो अहम पक्षकार सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने अपने शपथ पत्र में कहा है कि मामलों को आपसी समझबूझ से हल करने की कोई संभावना नहीं है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः आभा एम

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