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जर्मन चुनाव

अयोध्या पर फैसले से पहले सब चाकचौबंद

अयोध्या पर हाई कोर्ट के फैसले से पहले जहां हर तरफ चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था है, वहीं राज्य के सियासी हालात को देखते हुए इसका राजनीतिक फायदा लेने की कोशिशों ने इनकार नहीं किया जा सकता. यूपी में जल्द ही पंचायत चुनाव हैं.

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पूरे राज्य में फ्लैग मार्च

उत्तर प्रदेश में इस वक्त बीएसपी की सरकार है. पार्टी को यकीनन मुसलमानों के वोट चाहिए लेकिन वह समाजवादी पार्टी, बीजेपी या कांग्रेस की तरह हिंदू मुस्लिम वोटों की सियासत नहीं करती. इसीलिए मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि अमन चैन बिगड़ने वालों को किसी किस्म की रियायत नहीं दी जाएगी. सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ भी सरकार ने गजब का अभियान चलाया हुआ है. पूरे राज्य में अपराधिक चरित्र और सांप्रदायिक पहचान वाले करीब दस हजार लोगों पर या तो पाबंदियां लगाई गई हैं या उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया गया है.

सैकड़ों माफिया लोगों को राज्य छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया है. पुलिस ने कम्युनिटी पुलिसिंग की भी अच्छी व्यवस्था की है. पूरे राज्य में फ्लैग मार्च करा कर कानून व्यवस्था का अहसास कराया जा रहा है. केंद्र से 600 से ज्यादा कंपनी सुरक्षा बल मांगे गए हैं और 42 कंपनियां मिल भी गई हैं.

अयोध्या पर हाई कोर्ट का फैसला ऐसे समय में आ रहा है जब राज्य पर चुनावी बुखार हावी है. पंचायत चुनाव के पहले और दूसरे चरण के लिए अब तक करीब पांच लाख नामांकन हो चुके हैं. हालांकि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में पार्टियां सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लेती हैं. लेकिन इस बार पंचायत चुनावों में अत्यधिक उत्साह देखने को मिल रहा है. प्रथम चरण के लिए 23 सितंबर से नामांकन शुरू हुआ. पिछले चुनाव में कुल 18 लाख नामांकन हुए थे, जबकि इस बार पहले चरण में ही चार लाख से ज्यादा नामांकन हुए.

राज्य में चुनावी हिंसा की भी खबरें हैं. अब तक पांच लोग मारे जा चुके हैं. राज्य के 70 जिलों में करीब 42 हज़ार पंचायतों के लिए सात लाख 60 हजार जन प्रतिनिधियों का चुनाव होना है. करीब 11 करोड़ मतदाता इसमें हिस्सा लेंगे. यह चुनाव 30 अक्तूबर को समाप्त होंगे. ऐसे में, अयोध्या पर हाई कोर्ट का फैसला बेहद संवेदनशील मामला हो जाता है. हालांकि बीजेपी जैसी हिंदूवादी पार्टी भी अयोध्या विवाद पर शांति कायम रखने की अपील कर रही है.

रिपोर्टः सुहेल वहीद, लखनऊ

संपादनः ए कुमार

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