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ताना बाना

अयोध्या केस का फैसला 24 सितंबर को

अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को फैसला सुनाएगा इलाहाबाद हाईकोर्ट. तनाव या टकराव की आशंका को टालने के लिए राज्य और केंद्र सरकार हरकत में आईं. प्रधानमंत्री ने कहा, 24 सितंबर देश के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती का दिन होगा.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की विशेष बेंच इस बात पर फैसला सुनाएगी कि अयोध्या की विवादित जमीन पर किसका हक है. हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के नोटिस में कहा गया है, ''विशेष बेंच 24 सितंबर को फैसला सुनाएगी.'' सूत्रों का कहना है कि हाईकोर्ट ने फैसले की तारीख को जानबूझकर आगे किया है, ताकि राज्य प्रशासन को सुरक्षा संबंधी तैयारियां करने का वक्त मिल जाए.

फैसले की तारीख के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की चिंताएं बढ़ गईं हैं. राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा है. केंद्र से सुरक्षा बलों की 485 कंपनियां मांगी गईं हैं. 485 कंपनियों के इन 48,500 जवानों को फैसले वाले दिन पूरे यूपी में तैनात किया जाएगा.

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी बुधवार को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. मनमोहन ने केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और रक्षा मंत्री एके एंटनी से मामले की चर्चा की. सूत्रों का कहना है कि फैसले को लेकर केंद्र सरकार भी बेचैन है.

केंद्र को आशंका है कि कोर्ट के फैसले के बाद कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है. इन बातों को ध्यान में रखकर सरकार सुरक्षाकर्मियों की संख्या तय करेगी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि 24 सितंबर देश के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती वाली तारीख होगी. अंग्रेजी के एक बड़े अखबार से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ''इस फैसले के दिन और उसके बाद जिस तरह के हालात होंगे उसका देश के विकास पर गहरा असर पड़ेगा.''

Sonia Gandhi und Manmohan Singh

चिंता में सरकार

अयोध्या की जमीन के लिए पिछले 60 साल से कानूनी लड़ाई चल रही है. लेकिन मामला 1992 में अचानक सुर्खियों में आया. 6 दिसंबर 1992 को हिंदू उग्रपंथियों ने विवादित जमीन पर बनी बाबरी मस्जिद को ढहा दिया. इसके बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे हुए, जिनमें हजारों लोगों की मौत हो गई. चरमपंथ की एक नई विचारधारा का भी यहीं से जन्म हुआ. देश की राजनीति में भी इसका बड़ा असर पड़ा. भारतीय जनता पार्टी को अयोध्या आंदोलन से ताकत मिली और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में इस आंदोलन के बाद हाशिए पर चली गई.

हिंदू उग्रपंथी संगठनों का कहना है कि विवादित ढांचा राम जन्म भूमि पर बना है. जबकि मुस्लिम संगठनों का कहना है कि विवादित जमीन का राम जन्म भूमि से कोई लेना देना नहीं है. अदालत में पेश किए गए सबूतों में कहा गया है कि विवादित जमीन पर 1528 बाबरी मस्जिद बनाई गई.

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुस्लिम समुदाय के बड़े धार्मिक नेताओं ने लोगों से शांति बनाने की अपील की है. नई दिल्ली में जामा मस्जिद के शाही इमाम, सैयद अहमद बुखारी ने कहा, ''फैसला चाहे जो भी आए उसके बाद अगर कोई भड़काए भी तो मैं मुस्लिम समुदाय से अपील करता हूं कि कानून को अपने हाथ में न लें.''

रिपोर्ट: एजेंसियां/ ओ सिंह

संपादन: एन रंजन

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