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दुनिया

अमेरिकी सैनिक के लिए विकीलीक्स ने दिए हजारों डॉलर

विकीलीक्स को अमेरिकी दस्तावेज देने के आरोप में पकड़े गए अमेरिकी सैनिक के बचाव के लिए एक फंड बनाया गया है. इस फंड ने कहा है कि गुरुवार को उसे विकीलीक्स वेबसाइट से 15 हजार डॉलर मिले.

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अमेरिकी सैनिक प्राइवेट ब्रैडले मैनिंग इस वक्त वर्जीनिया में एक सैन्य जेल में बंद हैं. उन्हें पिछले साल जुलाई में गिरफ्तार किया गया. उन पर अमेरिकी सेना और विदेश मंत्रालय के दस्तावेज विकीलीक्स को लीक करने का आरोप है. हालांकि विकीलीक्स ने बार बार कहा है कि उसे मैनिंग के बारे में जानकारी नहीं है. लेकिन वह मैनिंग के बचाव के लिए मदद करना चाहती है.

Bradley Manning Wikileaks

प्राइवेट ब्रैडले मैनिंग

ब्रैडले मैनिंग सपोर्ट नेटवर्क ने गुरुवार को कहा कि विकीलीक्स ने मैनिंग के वकील के खाते में 15 हजार डॉलर भेजे हैं. यह जानकारी bradleymanning.org नाम की वेबसाइट पर जारी की गई है. वेबसाइट ने कहा, "वीजा, मास्टरकार्ड और पे पॉल जैसी कंपनियों की शर्मनाक हरकतों की वजह से विकीलीक्स को इस वक्त बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए ऐसे वक्त में भी मदद देने के लिए ब्रैडले मैनिंग सपोर्ट नेटवर्क विकीलीक्स की तारीफ करता है."

सपोर्ट फंड के संस्थापक माइक गोगुल्स्की ने कहा, "विकीलीक्स का यह दान हमारी कोशिशों में अहम योगदान है. इससे ब्रैडले को निष्पक्ष और खुली सुनवाई दिलाने में मदद मिलेगी."

विकीलीक्स के इस योगदान के साथ ही ब्रैडले के लिए पैसा जुटा रहे फंड में कुल एक लाख डॉलर जमा हो गए हैं. सपोर्ट नेटवर्क का कहना है कि उसे ब्रैडले के मजबूत बचाव के लिए कुल एक लाख 15 हजार डॉलर की जरूरत है.

मैनिंग अमेरिकी सेना के एक छोटे रैंक के सैनिक थे. वह इराक में खुफिया सर्विस में तैनात थे. उन्हें मई में गिरफ्तार किया गया और बाद में वर्जीनिया स्थित यूएस मरीन कॉर्प्स के बेस में भेज दिया गया. अमेरिकी अधिकारियों ने अब तक यह नहीं बताया है कि मैनिंग पर मुकदमा कब शुरू किया जाएगा. अगर मैनिंग का दोष साबित हो जाता है तो उन्हें 52 साल तक की कैद हो सकती है.

विकीलीक्स के फाउंडर जूलियन असांज ने कहा है कि अमेरिका मैनिंग का इस्तेमाल उनके खिलाफ मुकदमा तैयार करने के लिए कर रहा है. हालांकि उन्होंने कहा कि वे मैनिंग का नाम तक नहीं जानते थे और उन्होंने मैनिंग के बारे में मीडिया के जरिए ही जाना.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ईशा भाटिया

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