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दुनिया

अमेरिकियों के इलाज का पैसा देंगे भारतीय

अमेरिका में 9/11 के हमले की वजह से बीमार हुए लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी. और इसके लिए पैसा भारत, चीन और थाईलैंड जैसे देशों के लोगों से लिया जाएगा. ऐसा कानून बना दिया गया है.

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9/11 के आतंकवादी हमलों से जुड़ा अमेरिका का एक नया स्वास्थ्य कानून भारतीय और अन्य आईटी कंपनियों के मुनाफे में सेंध लगा सकता है. इस कानून के तहत बीमारों के इलाज के लिए पैसा कुशल कामगारों की बढ़ी वीजा फीस से जुटाया जाएगा.

2010 के जेम्स जदरोगा 9/11 हेल्थ एंड कंपेनसेशन एक्ट में 4.3 अरब डॉलर जुटाने की बात कही गई है. यह पैसा उन लोगों के मुफ्त इलाज में इस्तेमाल किया जाएगा जो ट्विन टावर्स का मलबा उठाने की वजह से बीमार हुए. 9/11 के आतंकवादी हमले में ये ट्विन टावर्स गिर गए थे जिस वजह से टनों धूलभरा मलबा जमा हो गया. इस मलबे की सफाई की वजह से कई लोग बीमार हो गए. अमेरिकी सरकार उन लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराएगी. यह पैसा एच-1बी वीजा की फीस बढा़कर जुटाया जाएगा. अमेरिका आने वाले कुशल कामगारों को इस वीजा की जरूरत पड़ती है.

भारत ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है. उसने कहा है कि यह पीछे की ओर जाने वाला कदम है. भारतीय आईटी उद्योग ने भी अमेरिका के इस कदम पर निराशा जताई है. उद्योग जगत ने कहा है कि अमेरिका अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए सिर्फ विदेशी कंपनियों पर टैक्स लगा रहा है.

बुधवार रात को पास हुआ यह बिल पांच साल में 4.3 अरब डॉलर जुटाने की बात करता है. यह पैसा मुख्य तौर पर भारत, चीन और थाईलैंड जैसे देशों की कंपनियों पर टैक्स लगाकर जुटाया जाएगा. ये कंपनियां डब्ल्यूटीओ के अग्रीमेंट ऑन गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट यानी सरकारी खरीद समझौते के दायरे में नहीं आतीं.

इस रकम का एक हिस्सा जुटाने के लिए एच-1बी और एल-1 वीजा की कुछ श्रेणियों पर फीस की बढ़ोतरी को जारी रखा जाएगा. इस फैसले का सीधा असर भारतीय आटी कंपनियों पर पड़ेगा. अमेरिका ने इसी साल अगस्त में वीजा फीस बढ़ाई थी. यह फीस बढ़ाने की वजह सीमा सुरक्षा के लिए फंड जुटाना बताया गया.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए जमाल

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