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दुनिया

अमेरिकियों का उतरा एक और नकाब

विकीलीक्स ने फिर धमाका किया है. जिसकी हर किसी को उम्मीद रही होगी, अब विकीलीक्स ने पुष्टि कर दी है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए फ्रांस के राष्ट्रपतियों की जासूसी करती रही है. क्या बातें पता थीं एनएसए को?

फ्रांस के उदारवादी दैनिक लिबरास्यों का कहना है कि पहली बार इस बात के अकाट्य सबूत हैं कि अमेरिका ने कम से कम 2002 से निजी टेलिफोनों की निगरानी में फ्रांस के राष्ट्रपतियों को भी शामिल कर लिया. फ्रांसीसी सहयोगियों पर अमेरिकियों के संदेह के बावजूद इस बात में बहुत अंतर है कि आप फ्रांस के परमाणु कार्यक्रम के बारे में जानना चाहते हैं या सारकोजी और ओलांद के निजी टेलिफोन को सुनते हैं. विकीलीक्स के नए रहस्योद्घाटन से एक और नकाब उतर गया है.

नकाब उतरा तो अमेरिका की खुफियागिरी की हदों का पता तो चला ही, यह भी मालूम हुआ कि उन्हें फ्रांस के राष्ट्रपतियों से क्या पता चला. विकीलीक्स ने दस्तावेज अपने पेज पर डाले हैं. टॉप सीकरेट बताए गए 22 मई 2012 के एक नोट से पता चलता है कि राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद ने यूरोजोन से ग्रीस के बाहर निकलने के परिणामों पर गुप्त बैठकों की अनुमति दी थी. ओलांद ने सत्ता संभालने के कुछ ही दिन बाद जर्मनी की सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी के साथ गुप्त बैठक भी तय की थी. प्रधानमंत्री जाँ मार्क एरो ने कूटनीतिक समस्याओं की वजह से बैठक को गोपनीय रखने की चेतावनी दी थी.

इस नोट के अनुसार चांसलर अंगेला मैर्केल से मिलने के बाद ओलांद ने शिकायत की थी कि भेंट से कुछ भी काम का नहीं निकला. चांसलर ग्रीस पर तय रवैया रखती हैं और समझौते के लिए तैयार नहीं हैं. नोट का कहना है कि इसने ओलांद को ग्रीस और ग्रीक जनता के लिए चिंतित कर दिया, जो उनके अनुसार चरमपंथी पार्टी के लिए वोट कर सकते थे.

एक अन्य नोट में सारकोजी के बारे में जानकारी दी गई है और कहा गया कि वे अपने को अकेला ऐसा व्यक्ति मानते हैं जो विश्व आर्थिक संकट का हल दे सकता है. 2008 के इस नोट में बताया गया है कि निकोला सारकोजी किस तरह से विश्व वि्ततीय संकट को सुलझाने को यूरोप और दुनिया के लिए अपनी जिम्मेदारी समझते थे. सारकोजी का विश्वास था कि फ्रांस की ईयू अध्यक्षता और अमेरिका की निष्क्रियता के कारण वे अकेले हैं जो यह काम कर सकता है. नोट के अनुसार सारकोजी ने बहुत सारी आर्थिक समस्याओं के लिए अमेरिका की गलतियों को जिम्मेदार ठहराया लेकिन साथ ही "विश्वास जताया कि अमेरिका अब उनकी कुछ सलाह को मान रहा है."

24 मार्च 2010 के एक नोट में कहा गया है कि सारकोजी ने प्रस्तावित द्विपक्षीय खुफिया सहयोग संधि में देरी के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से अपनी निराशा जताने की योजना बनाई थी. विवाद का मुख्य मुद्दा फ्रांस में जासूसी करते रहने की अमेरिका की इच्छा थी. 2011 के एक दूसरे नोट में कहा गया है कि सारकोजी इस्राएल और फलीस्तीनियों के बीच मुख्य शक्तियों की कम दिलचस्पी के बावजूद सीधी शांति वार्ता शुरू कराने के इच्छुक थे. वे इसके लिए संभावित संयुक्त पहल के बारे में रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेद्वेदेव से अपील करना चाहते थे. फलीस्तीनी राज्य के मुद्दे पर वे ओबामा को चेतावनी भी देना चाहते थे.

एमजे/एसएफ (डीपीए, एएफपी)

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