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ताना बाना

अमेरिका: यूनिवर्सिटी घोटाले में एजेंटों पर शिकंजा

भारत सरकार अमेरिकी ट्राई वैली विश्वविद्यालय वीजा घोटाले में छात्रों को फंसाने में एजेंटों की भूमिका जांच रही है. प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि ने वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास से इस पर जानकारी देने को कहा है.

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वायलार रवि

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि से मिलने के बाद प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि ने कहा," अगर आंध्र प्रदेश से कोई एजेंट इसमें शामिल हैं, तो मैं मुख्यमंत्री से तुरंत इन पर कार्रवाई करने को कहूंगा." उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने भारतीय छात्रों के पासपोर्ट लेकर गलती की है. अगर विश्वविद्यालय पर गैरकानूनी आप्रवासन के आरोप सही साबित होते हैं, तो इन छात्रों को भारत वापस भेज दिया जाएगा.

भारतीय छात्रों के साथ बुरे सलूक पर रवि का कहना था, "अमेरिकी अधिकारियों ने जो किया है, वह निंदनीय है. उनके शरीर पर कोई रेडियो टैग नहीं बांधा जाना चाहिए. मुझसे कहा गया है कि यह बहुत भारी है और इसे लेकर चलना मुश्किल है. छात्र कही भाग कर नहीं जाने वाले."

रवि ने कहा कि वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास सोमवार या मंगलवार को घटना पर एक रिपोर्ट भेजेगी जिसके बाद इस सिलसिले में फैसला लिया जाएगा. इस बीच भारतीय दूतावास ने ओबामा प्रशासन से कहा है कि वह छात्रों पर अत्याचार होने से उन्हें बचाए. छात्रों के लिए एक ईमेल हेल्पलाइन भी बनाई गई है.

इनमें से ज्यादातर छात्र आंध्र प्रदेश से हैं. पिछले हफ्ते जांच में पता चला अमेरिकी यूनिवर्सिटी में फर्जी ढंग से छात्रों को दाखिला दिया गया. छात्र वहां पढ़ने के लिए नहीं बल्कि वीजा हासिल होने के बाद अन्य शहरों में काम कर रहे थे. घोटाले के खुलासे से सैन फ्रैंसिस्को के पास ट्राई वैली विश्वविद्यालय को बंद कर दिया गया और वहां दाखिल छात्रों को पूछताछ के लिए रखा गया है.

आप्रवासन वकीलों और भारतीय अमेरिकी समुदाय के लोग इन छात्रों की मदद कर रहे हैं. उनका कहना है कि इनमें से कई को बॉन्ड पर रिहा किया गया है. अमेरिकी तेलुगू एसोसिएशन के राम मोहन कोंडा का कहना है, "इन छात्रों को नहीं पता कि इनके साथ क्या होगा. बॉन्ड के तहत इनसे कई हजार डॉलर मांगे जा रहे हैं. लेकिन उन्हें जल्द से जल्द एक विश्वविद्यालय में दाखिला लेना होगा. अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके वीजा खत्म हो जाएंगे और वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाएंगे."

पिछले हफ्ते कैलिफॉर्निया राज्य के एक न्यायालय में विश्वविद्यालय के खिलाफ एक शिकायत दर्ज की गई थी. इसके मुताबिक विश्वविद्यालय गैर कानूनी तरीके से विदेशी नागरिकों को अमेरिका ला रहा था.

विश्वविद्यालय में 1,555 छात्र हैं और इनमें से 95 प्रतिशत भारतीय नागरिक हैं. इनमें से केवल 140 छात्रों को विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए वीजा दिए गए थे. कई छात्र अमेरिका के बाकी विश्वविद्यालयों से ट्रांस्फर हो कर इस विश्वविद्यालय में आए थे. इस तरह संस्थान में पढ़ रहे छात्रों की संख्या को बढ़ाया गया था.

रिपोर्टः पीटीआई/एमजी

संपादनः एस गौड़