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विज्ञान

अमेरिका में मक्के की खेती का दुश्मन

स्ट्रियाकोस्टा आलबिकोस्टा - क्या शानदार नाम है? और लातिन भाषा के इस नाम के पीछे छिपा है एक कीड़ा, जो इन दिनों अमेरिका में मक्के की फसल को तहस नहस कर रहा है.

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वैसे तो इस कीड़े के जर्मन या अंग्रेजी नाम का मतलब है बीन्स खाने वाला कीड़ा, लेकिन दूसरी फसलों से भी उसे कोई एतराज नहीं होता. और खासकर मक्का उसे बहुत प्यारा लगता है. सबसे पहले इस कीड़े ने आइओवा प्रदेश पर धावा बोला, फिर इंडियाना, ओहायो और अंत में पेंसिलवेनिया. इस बीच मक्के की खेती का पूरा इलाका इन कीड़ों से ग्रस्त है.

दरअसल पिछले 10 साल से अनेक अमेरिकी किसान जेनेटिक ढंग से बदले गए मक्के के बीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन बीजों में एक ऐसा जीन्स डाला गया है, जो कई कीड़ों मकोड़ों को मार डालता है. इस प्रकार स्ट्रियाकोस्टा आलबिकोस्टा का कोई प्राकृतिक दुश्मन नहीं रह गया है, और उसकी तादाद बढ़ती जा रही है. कुछ अन्य कारण भी हैं.

Atomkraftwerk in Frankreich - Bugey

मिन्नेसोटा विश्वविद्यालय के इनसेक्ट स्पेशलिस्ट बिल हचिनसन की राय में जलवायु परिवर्तन से भी इसका लेनादेना है. वह कहते हैं, " पिछले बीस सालों से अमेरिका के मध्य पूर्व में तापमान औसत से अधिक रहा है. जाड़े में ठंडक भी नहीं रहती है. पहले की तरह कीड़े मर नहीं जाते, बल्कि ज़मीन के नीचे जाड़ा बिताते हैं. इन कीड़ों के फैलाव की यह भी एक वजह हो सकती है."

पर्यावरण सम्मत खेती भी इन कीड़ों के फैलने के लिए जिम्मेदार है. मध्य पूर्व अमेरिका के अनेक किसान मक्का और सोया बदल बदल कर बोते हैं. सोया के बीज भी जेनेटिक ढंग से बदले जाते हैं और कीटनाशकों से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचता. इसलिए कीटनाशक छिड़के जाते हैं और ज्यादा हल चलाने की जरूरत नहीं होती है. नतीजा यह होता है कि जमीन के नीचे ये कीड़े जिंदा रहते हैं और सोये की खेती के बाद जब मक्का बोया जाता है और उसकी फसल आती है, तो इन कीड़ों की भी बन आती है.

क्या जेनेटिक मक्के की खेती बंद कर दी जाए? फिर व्यापक स्तर पर कीटनाशकों का इस्तेमाल करना पड़ेगा, जो उपयोगी कीड़ों को भी मार डालेंगे, प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ेंगे. जेनेटिक बीजों का इस्तेमाल किया जाए, तो स्ट्रियाकोस्टा आलबिकोस्टा बढ़ते रहेंगे. एक दुधारी तलवार, और सबसे बड़ी बात कि कृषि वैज्ञानिकों के पास अभी तक इस समस्या का कोई हल नहीं है.

रिपोर्टः एजेंसियां/उभ

संपादनः वी कुमार

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