1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

अमेरिका ने किम जोंग उन से बातचीत का प्रस्ताव ठुकराया

अमेरिका ने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन का रवैया बेतुका है और उनसे बात नहीं हो सकती. इस तरह अमेरिका ने बातचीत के चीन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.

चीन ने अमेरिका से दक्षिण कोरिया के साथ चल रहे सैन्य अभ्यास रोकने को कहा था ताकि बदले में उत्तर कोरिया भी अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को रोक दे. लेकिन अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने इसे बेहद अव्यावहारिक करार दिया है. उन्होंने कहा अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ अपने रक्षा सहयोग के क्षेत्र में जो भी कर रहा है उसकी उत्तर कोरिया के साथ कोई तुलना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है. टोनर ने कहा कि उत्तर कोरिया का व्यवहार विवेकपूर्ण नहीं रहा है और दुनिया को यह समझने की जरूरत है कि उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम सिर्फ 'अमेरिका और उत्तर कोरिया के बारे में नहीं है' और 'हर देश को सोचना चाहिए कि हम बेहतर ढंग से कैसे प्रतिक्रिया दे सकते हैं.'

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली के मुताबिक "जो उत्तर कोरिया ने किया है उस पर अलग रुख अपनाया जाना चाहिये. वहां हमें किसी तार्किक व्यक्ति के साथ नहीं निपटना है. कोरियाई नेता किम जोंग उन की ओर से बेहद अविश्वसनीय और अंहकारी रुख सामने आया है." 

हेली ने बताया कि नया अमेरिकी प्रशासन पूरे मसले पर निगाह बनाये हुये है और उत्तर कोरिया से निपटने के सारे विकल्प भी खुले हुये हैं. उन्होंने साफ किया कि अगर उत्तर कोरिया की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई होती है तभी अमेरिका इस पर विचार करेगा.

बीते सोमवार को उत्तर कोरिया ने चार बैलस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया था जिनमें से तीन जापान के समुद्री क्षेत्र में गिरी थीं. दक्षिण कोरिया और अमेरिका के साझा सैन्याभ्यास के दौरान उत्तर कोरिया ने यह कदम उठाया. उत्तर कोरिया के मीडिया के हवाले से यह भी कहा गया था कि इस मिसाइल परीक्षण को किम जोंग उन की निगरानी में किया गया है. इसके बाद अमेरिका ने दक्षिण कोरिया में मिसाइल प्रतिरोधी प्रणाली टीएचएएडी की तैनाती शुरू कर दी है.

दोनों पक्षों के बीच पैदा तनाव को दूर करने के लिये चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एक प्रस्ताव रखा था. संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत लियू जीएई ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में बन रही स्थिति वाकई भयावह है और इससे पैदा हो रहे खतरे को नहीं नकारा जा सकता. उन्होंने कहा कि चीन के प्रस्ताव का मकसद तनाव को कम करना है ताकि स्थिति हाथ से न निकले. वहीं दक्षिण कोरिया ने भी चीन के प्रस्ताव का विरोध करते हुये इसे महज एक रक्षात्मक कार्रवाई बताया है.

एए/एके (रॉयटर्स, एपी, एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री