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दुनिया

अमेरिका को तारीफ का हक

जर्मनी में अमेरिका की अक्सर आलोचना होती है. लेकिन राहतकर्मियों को अलग थलग रखने के उसके फैसले की आलोचना हो रही है. डॉयचे वेले के मियोद्राग सोरिच का कहना है कि इबोला से लड़ने में अमेरिका के कदमों का पूरा समर्थन होना चाहिए.

नहीं, अमेरिका सबको संतुष्ट नहीं कर सकता. खासकर यूरोपीयनों को नहीं जो कभी कभी इराक या अफगानिस्तान में अमेरिकी युद्ध के लिए अटलांटिक पार के "बड़े भाई" की खिल्ली उड़ाते हैं. वाशिंगटन अपने पीछे देश छोड़ जाता है जो अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद पहले से भी बुरी हालत में दिखते हैं. सिर्फ इसी वजह से यूरोप में अमेरिका विरोधी भावना नहीं बढ़ रही. जर्मनी में और बातें भी हैं, बहुत से लोग इसलिए भी नाराज हैं कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए ने सालों तक जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल के मोबाइल फोन की जासूसी की और अब तक भरोसा तोड़ने के लिए माफी नहीं मांगी है.

अमेरिका विरोध का फैशन

इसका अमेरिका विरोधी भावना को फायदा मिल रहा है और मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत के लिए उचित माहौल नहीं बना रहा. बातचीत की गति धीमी है. बहुत से यूरोपीय अमेरिका के साथ निकट व्यापारिक संबंधों को अस्वीकार कर रहे हैं. दलील के तौर पर क्लोरीन वाले मुर्गों या जीन संवर्धित मक्के की मिसाल दी जाती है. लेकिन समझौते के बावजूद यूरोपीय संघ में किसी पर वह सामान खरीदने की जबरदस्ती नहीं होगी जो वह नहीं खरीदना चाहता. वैसे अमेरिकियों पर अविश्वास करना इस समय फैशन में है. तेज आर्थिक विकास या समान औद्योगिक मानकों जैसे मुक्त व्यापार समझौते के फायदों की कोई बात नहीं करता. ट्रांस अटलांटिक रिश्ते इतने खराब दिख रहे हैं जितने रोनाल्ड रेगन के समय से नहीं थे. कुछ साल पहले किसने ऐसा सोचा होगा, जब बराक ओबामा व्हाइट हाउस की कमान संभाली थी.

उन्होंने अब दृढ़ता के साथ इबोला के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत की है. राष्ट्रपति ओबामा इबोला के प्रकोप को रोकने के लिए नवंबर के अंत तक पश्चिम अफ्रीका में स्वास्थ्य संरचना बनाने के लिए करीब 4,000 सैनिकों को भेजेंगे. लाइबेरिया में इबोला संक्रमित लोगों के इलाज के लिए 17 हेल्थ सेंटर बनाए जाएंगे. मरीजों के इलाज के दौरान संक्रमित हुए नर्सों का इलाज फील्ड अस्पताल में किया जाएगा जो अमेरिका मोनरोविया के हवाई अड्डे पर बना रहा है. वाशिंगटन बीमारी की जांच के लिए पैथोलॉजिस्टों को भी भेज रहा है. भविष्य में लाइबेरिया में कुछ घंटों के अंदर इबोला टेस्ट के नतीजे मिल जाएंगे. वहां हजारों स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग होगी ताकि मरीजों का इलाज हो सके.

क्यूबा का भी समर्थन

यूरोप में ऐसे आलोचक हैं जो चिकित्सीय और मानवीय सहायता के सैनिकीकरण का विरोध करने लगे हैं. वे इसका भी ख्याल नहीं कर रहे हैं डॉक्टर्स विदाउट बोर्डर्स ने ही सेना को तैनात करने की मांग की थी. इबोला महामारी लाइबेरिया, गिनी और सिएरा लियोन में पहले से कमजोर चिकित्सीय ढांचे, सार्वजनिक सुरक्षा, प्रशासन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी खतरे में डाल रही है.

वाशिंगटन की आलोचना करने के बदले अमेरिकी प्रशासन को भरपूर समर्थन की जरूरत है. साथ मिलकर किए जाने वाले अच्छे काम से ज्यादा और कोई बात हमें नहीं जोड़ती. इबोला के खिलाफ संघर्ष में अब तक जानी दुश्मन रहे अमेरिका और क्यूबा भी करीब आ रहे हैं. कास्त्रो ने अक्टूबर के शुरू में ही सैकड़ों डॉक्टरों और नर्सों को पश्चिम अफ्रीका भेजा है. इसके लिए अमेरिकी विदेश मंत्री ने उनकी सराहना की है. बदले में क्यूबा ने अमेरिकी सेना की तैनाती का स्वागत किया है. दोनों पक्ष लाइबेरिया में सहयोग करना चाहते हैं. यदि क्यूबा अपने परंपरागत अमेरिका विरोध को कुछ समय के लिए दरकिनार कर सकता है तो यह यूरोप में भी संभव होना चाहिए.

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