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जर्मन चुनाव

अमेरिका के लिए हुआ जुलाई जानलेवा

अफगानिस्तान में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं. इसके साथ अफगानिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ 9 साल से चल रही लड़ाई में जुलाई का महीना अमेरिकी फौजों के लिए सबसे जानलेवा महीना साबित हुआ है.

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पश्चिमी सैनिक सहबंध नैटो द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि तीन सैनिकों की मौत दक्षिणी अफगानिस्तान में दो अलग अलग धमाकों में हुई. नैटो के बयान में सैनिकों की राष्ट्रीयता नहीं बताई गई है लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने गोपनीयता की शर्त पर कहा है कि तीनों अमेरिकी थे. औपचारिक घोषणा मृतकों के परिजनों को सूचना दिए जाने के बाद की जाएगी.

इन मौतों के साथ जुलाई में अफगानिस्तान युद्ध में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या 63 हो गई है. अब तक जून अमेरिकी फौजों के लिए सबसे जानलेवा महीना था जिसमें 60 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी. नैटो के लिए यह संख्या104 थी.

इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने कहा है कि अफगान युद्ध अमेरिकी दस्तावेजों के लीक होने से युद्ध में शामिल अमेरिकियों की जान और क्षेत्र में अमेरिका के संबंध जोखिम में पड़ गए हैं. उन्होंने मामले की सख्ती से जांच कराने और दोषियों को सजा देने का वचन दिया है और एफबीआई से मामले की जांच में मदद देने को कहा है.

Anschlag auf ISAF-Tanklastwagen

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रक्षामंत्री गेट्स ने एक प्रेस कांफ़्रेंस में कहा कि दस्तावेजों के लीक होने से अमेरिकी खुफिया सेवाओं के स्रोत और तरीके सामने आ गए हैं और अमेरिका के विरोधियों को सैनिक रणनीति और उसे तय करने के तौर तरीके का पता चल गया है.

विकीलीक्स वेबसाइट ने अफगान युद्ध पर लगभग 92 हजार दस्तावेजों को जारी किया था. विकीलीक्स के संस्थापक जूलियान ऐसेंज ने उन्हें जारी किए जाने को सही ठहराया है और कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि इससे युद्ध पर बहस शुरू हो सकेगी. विकीलीक्स साइट पर लीक हुए दस्तावेजों से यह बात भी सामने आती है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अफगानिस्तान में तालिबान चरमपंथियों की मदद कर रही है.

अफगानिस्तान में नैटो मिशन ने अफगानिस्तान से जुड़ी खुफिया दस्तावेजों के लीक होने की कड़ी आलोचना की है. जर्मनी के ब्रिगेडियर जनरल योसेफ प्लोत्स ने कहा है कि लीक के चलते आम लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: आभा एम