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दुनिया

अमेरिका के कॉलेजों को सता रहा है यह डर

अमेरिकी शिक्षण संस्थान दुनिया भर में छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं लेकिन अब इन संस्थानों को डर है कि देश का बदलता राजनीतिक माहौल विदेशी छात्रों की संख्या को घटा सकता है.

अमेरिका के कॉलेज दुनिया भर में छात्रों के बीच पसंद किये जाते रहे हैं. इस साल भी अमेरिकी कॉलेजों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की अच्छी संख्या नजर आ रही है. लेकिन एक डर है जो इन कॉलेजों को अब सताने लगा है. देश में हुए एक सर्वे के मुताबिक, यहां के बदलते राजनीतिक माहौल में शिक्षण संस्थाओं को डर है कि आने वाले सालों में विदेशी छात्रों का रुझान कम हो सकता है. द इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि विदेशों से आने वाले कुल छात्रों की तुलना में इस साल तकरीबन सात फीसदी की गिरावट आयी है.

इस सर्वे में 500 से भी ज्यादा कॉलेज और यूनिवर्सिटी को शामिल किया गया है. हालांकि रुझान कैंपस दर कैंपस अलग-अलग रहा है लेकिन तमाम संस्थाओं को डर है कि यह राजनीतिक माहौल छात्रों को अमेरिका से दूर कर सकता है. देश के 45 फीसदी स्कूलों ने इस गिरावट को स्वीकार किया है, वहीं अब भी कुछ संस्थायें अधिक छात्रों के आने का दावा कर रही हैं तो 24 फीसदी संस्थाओं के मुताबिक इसमें कोई बदलाव नहीं आया है.

विशेषज्ञों के मुताबिकब, व्हाइट हाउस की ओर से कई देशों पर लगाये यात्रा प्रतिबंध जैसे कदमों ने विदेशों से आने वाले छात्रों के मन में शंकाएं पैदा की हैं. हालांकि इन्हीं कारणों के चलते अब कुछ कॉलेज कैंपसों ने विदेशी छात्रों के लिए मार्केटिंग ड्राइव भी शुरू कर दी है. इसका कुछ असर भी दिखा है लेकिन सर्वे के मुताबिक अब भी हालात पहले की तरह सामान्य नहीं हैं. देश के 500 कॉलेजों में से आधे को इस बात कि चिंता है कि देश का मौजूदा माहौल छात्रों को निराश कर सकता है. सर्वे की मानें तो अब तक 20 फीसदी छात्र इस कारण देश छोड़ कर जा भी चुके हैं.

संस्थाओं के मुताबिक छात्रों की इस बेरुखी के लिए, ट्यूशन फीस में बढ़ोतरी, अन्य देशों के साथ मुकाबला और राजनीतिक माहौल को जिम्मेदार माना जा सकता है. सर्वे में कहा गया है कि चीन और भारत से आने वाले छात्रों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन इनकी दर पिछले सालों के मुकाबले कम है.

एए/आईबी (एपी)

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