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ताना बाना

अमन की राह पर बढ़े अब्बास और नेतन्याहू

इस्राएल और फलीस्तीन अमेरिका की अगुवाई में शांति और सुलह की राह पर चल पड़े हैं. वॉशिंगटन में दोनों पक्षों के नेता तल्खियों को भुलाकर बातचीत की मेज पर बैठे.

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क्लिंटन के साथ नेतन्याहू और अब्बास

इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और फलीस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने पहले दौर की बातचीत में शांति प्रक्रिया को मुकाम तक ले जाने का फैसला किया. बैठक का अंजाम जानने के लिए बेताब मीडिया को दोनों नेताओं ने बताया कि बातचीत को आगे भी जारी रखा जाएगा. इसके तहत अब्बास और नेतन्याहू 14 सितंबर को अगले दौर की बातचीत के लिए फिर मिलेंगे. यह मुलाकात मिस्र के शर्म अल शेख में होने की संभावना है.

इतना ही नहीं, दशकों से चल रहे खून खराबे को रोकने और इस्राएल और फलीस्तीन के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को कायम करने के मकसद को एक साल के भीतर पाने की समयसीमा तय कर दोनों नेताओं ने इसके लिए हर दो सप्ताह के अंतराल पर मुलाकातों का यह दौर जारी रखने का फैसला भी किया. करीब दो साल बाद फलीस्तीन और इस्राएल के शीर्ष नेताओं की यह पहली मुलाकात थी.

मध्यपूर्व समस्या के समाधान के लिए दोनों नेताओं ने फलीस्तीन और इस्राएल के रूप में दो पृथक राष्ट्रों के सुझाव पर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे ऐतिहासिक कामयाबी बताया.

NO FLASH Nahost Friedensverhandlungen in Washington

वहीं शांति प्रक्रिया का विरोध कर रहे फलीस्तीन के चरमपंथी संगठन हमास ने धमकी दी है कि वह इसे कामयाब नही होने देगा. इसके सुर में सुर मिलाते हुए ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने भी अब्बास व नेतन्याहू की मुलाकात को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. फलीस्तीनी एकता दिवस के मौके पर तेहरान में एक रैली में उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के लोगों में समूचे इलाके से यहूदी प्रभाव को नेस्तनाबूद करने की कूवत है और वे ऐसा कर दिखाएंगे.

उधर अब्बास और नेतन्याहू ने एक स्वर में हमास की तरफ इशारा करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के लिए सुरक्षा सबसे अहम मसला है और इसे नुकसान पंहुचाने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए.

अब्बास और नेतन्याहू की लगभग साढ़े तीन घंटे की मुलाकात के दौरान शुरू के डेढ़ घंटे क्लिंटन की मौजूदगी में बातचीत हुई. इसके बाद डेढ़ घंटे दोनों नेताओं ने एकांत में बात की. इस दौरान कोई सहायक या दुभाषिया भी मौजूद नहीं था. पहले दौर की शांतिवार्ता के अंतिम 20 मिनट की निर्णायक बातचीत क्लिंटन की मौजूदगी में हुई. इसके बाद खुशनुमा माहौल में तीनों नेताओं ने इसकी कामयाबी की जानकारी मीडिया को दी.

रिपोर्टः एजेंसियां/निर्मल

संपादनः आभा एम

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