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दुनिया

अभूतपूर्व फैसला: सड़क पर रेस लगाने वालों को उम्रकैद

बर्लिन में कारों की रेस लगाते हुए एक बुजुर्ग की जान लेने वाले दो युवकों को उम्रकैद की सजा मिली. अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए अभूतपूर्व फैसला सुनाया.

24 और 27 साल के दोषियों को बर्लिन की प्रांतीय अदालत ने कोई रियायत नहीं दी. शहर के भीतर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से रेस लगाते हुए दोनों युवकों ने तमाम नियम कायदों को तोड़ा ही था, एक व्यक्ति की जान ले ली थी.

करीब साल भर पहले हामदी एच (24) और मार्विन एन (27) ने एक बड़े सड़क हादसे को अंजाम दिया. फरवरी 2016 की सुबह ऑउडी A6 पर सवार हामदी और मर्सिडीज पर सवार मार्विन रेस लगा रहे थे. इस दौरान हामदी की कार एक एसयूवी से टकराई. टक्कर इतनी तेज थी कि एसयूवी में हवा में उछलती हुई 70 मीटर दूर छटक गई और उसमें सवार 69 साल के शख्स की मौत हो गई. टक्कर के बाद हामदी की कार मार्विन की गाड़ी से टकराई. दोनों कारों की चपेट में दो पैदल युवा भी आए, जिन्हें मामूली चोट आई.

रेस बर्लिन के मशहूर कुडाम इलाके में लगाई जा रही थी. बाजार और होटलों वाले उस इलाके में रेस लगाने को अदालत ने नियम कायदों की गंभीर तौहीन करार दिया. जर्मनी में यह ओवरस्पीडिंग के चलते हुई दुर्घटना की यह अब तक की सबसे कड़ी सजा है.

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह स्वीकार किया कि दोनों जानबूझकर किसी की जान नहीं लेना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह जरूर पता था कि उनकी हरकत का नतीजा जानलेवा हो सकता है. बचाव पक्ष ने दलील दी कि हामदी पर गैर इरातन नरसंहार का दोष लगाया जा सकता है, और मार्विन पर सड़क सुरक्षा को खतरे में डालने का. अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के बीच अदालत ने मनोचिकित्सक की भी राय ली. मनोचिकित्सक ने अदालत को बताया कि एक कार ड्राइवर ने अपने को "बतौर ड्राइवर जरूरत से बहुत ज्यादा आंका". वह अपने अंहकार को पुख्ता करने के लिए किसी भी कीमत पर रेस जीतना चाहता था. उसे अपनी गलती का भी अहसास नहीं है.

इन सब दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया. हालांकि इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन एक बात तो साफ है कि जर्मनी में प्रशासन सड़क पर बदतमीजी करने वालों को बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है.

(ईरान की सड़कों पर सिरफिरे​​​​​​​)

ओएसजे/एमजे (डीपीए, एएफपी)

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