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मनोरंजन

अभिनेता के रंग में रंग जाती थीं माला सिन्हा

बॉलीवुड में माला सिन्हा उन गिनी चुनी चंद अभिनेत्रियों में शुमार की जाती हैं जिनमें खूबसूरती के साथ बेहतरीन अभिनय का भी संगम देखने को मिलता है. आज उनका 78वां जन्मदिन है.

11 नवंबर 1936 को जन्मी माला सिन्हा अभिनेत्री नर्गिस से प्रभावित थीं और बचपन से ही उन्हीं की तरह अभिनेत्री बनने का ख्वाब देखा करती थीं. उनका बचपन का नाम अल्डा था और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे उन्हें डालडा कहकर पुकारा करते थे. बाद में उन्होंने अपना नाम अल्डा सिन्हा की जगह माला सिन्हा रख लिया. स्कूल के एक नाटक में माला सिन्हा के अभिनय को देखकर बंगला फिल्मों के जाने-माने निर्देशक अर्धेन्दु बोस उनसे काफी प्रभावित हुए और उनसे अपनी फिल्म "रोशनआरा" में काम करने की पेशकश की. उस दौरान माला सिन्हा ने कई बंगला फिल्मों में काम किया.

एक बार बंगला फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में उन्हें मुंबई जाने का अवसर मिला. मुंबई में उनकी मुलाकात केदार शर्मा से हुई जो उन दिनों "रंगीन रातें" के निर्माण में व्यस्त थे. उन्होंने माला सिन्हा को अपनी फिल्म के लिए चुन लिया. माला सिन्हा को 1954 में प्रदीप कुमार के साथ "बादशाह" और "हैमलेट" जैसी फिल्मों में काम करने का मौका मिला लेकिन दुर्भाग्य से उनकी दोनों फिल्में टिकट खिड़की पर विफल साबित हुई.

प्यासा से चमका सितारा

माला सिन्हा के अभिनय का सितारा निर्माता-निर्देशक गुरुदत्त की 1957 में प्रदर्शित क्लासिक फिल्म "प्यासा" से चमका. इस फिल्म की कामयाबी ने माला सिन्हा को स्टार के रूप में स्थापित कर दिया. इस बीच माला सिन्हा ने राजकपूर के साथ "परवरिश" और "फिर सुबह होगी", देवानंद के साथ "लव मैरिज" और शम्मी कपूर के साथ फिल्म "उजाला" में हल्के फुल्के रोल कर अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय दिया.

1959 में प्रदर्शित बीआर चोपड़ा निर्मित फिल्म "धूल का फूल" के हिट होने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में माला सिन्हा के नाम के डंके बजने लगे और बाद में एक के बाद एक कठिन भूमिकाओं को निभाकर वह फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गयी. "धूल का फूल" निर्देशक के रूप में यश चोपड़ा की पहली फिल्म थी. 1961 में माला सिन्हा को एक बार फिर से बीआर चोपड़ा की ही फिल्म "धर्मपुत्र" में काम करने का अवसर मिला जो उनके सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म साबित हुई. इसके बाद 1963 में माला सिन्हा ने उनकी सुपरहिट फिल्म "गुमराह" में भी काम किया.

राम और श्याम से किया इंकार

माला सिन्हा ने अपने सिने करियर में उस दौर के सभी दिग्गज अभिनेताओं के साथ अभिनय किया. वे हर अभिनेता के साथ उसी के रंग में रंग जाती थीं. महान अभिनेता दिलीप कुमार के साथ अभिनय करना किसी भी अभिनेत्री का सपना हो सकता है लेकिन माला सिन्हा ने उनके साथ फिल्म "राम और श्याम" में काम करने के लिए इसलिए इंकार कर दिया कि वह फिल्म में अभिनय को प्राथमिकता देती थीं न कि शोपीस के रूप में काम करने को. अभिनेता धर्मेन्द्र के साथ माला सिन्हा की जोड़ी खूब जमी. धर्मेन्द्र के अलावा उनकी जोड़ी विश्वजीत, प्रदीप कुमार और मनोज कुमार के साथ भी पसंद की गयी.

हिन्दी फिल्मों के अलावा माला सिन्हा ने अपने दमदार अभिनय से बंगला फिल्मों में भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.1958 में प्रदर्शित बंगला फिल्म "लुकोचुरी" माला सिन्हा के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म साबित हुई. इस फिल्म में उन्हें किशोर कुमार के साथ काम करने का मौका मिला. बंगला फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में यह फिल्म सर्वाधिक हास्य से परिपूर्ण सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है. आज भी जब कभी कोलकाता में छोटे पर्दे पर यह फिल्म दिखाई जाती है तो दर्शक इसे देखने का मौका नहीं छोड़ते.

1966 में माला सिन्हा को नेपाली फिल्म माटीघर में काम करने का मौका मिला. इस फिल्म के निर्माण के दौरान उनकी मुलाकात फिल्म के अभिनेता सीपी लोहानी से हुई. फिल्म में काम करने के दौरान माला सिन्हा को उनसे प्रेम हो गया और बाद में दोनों ने शादी कर ली. माला सिन्हा ने लगभग 100 फिल्मों में काम किया है.

एमजे/आईबी (वार्ता)

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