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विज्ञान

अब कोहरे से निकाला जाएगा पानी

अगर साइंस के आंकड़े उठाकर देखें तो लगेगा कि दुनिया पानी से ही बनी है. धरती के 71 फीसदी हिस्से पर, इंसान के शरीर में 60 फीसदी, पेड़ पौधों में पानी, हवा में पानी और अब तो चांद पर भी पानी मिल गया है.

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लंदन में कोहरा

कोहरा सिर्फ अंधकार मचा देने वाला धुआं ही नहीं है. इसमें सैकड़ों लीटर पानी है जिसका ज्यादातर हिस्सा इतना अच्छा होता है कि उसे पीने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है और वैज्ञानिकों के हाथों से कोहरा बच नहीं पाया है.

उन्होंने कोहरे को पकड़कर उसमें से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है. साइंस की भाषा में इसे मिल्किंग फॉग कहते हैं. दुनिया के कई देशों में मिल्किंग फॉग पर काम कर रहे प्रफेसर ओटो क्लेम ने इसमें महारत हासिल कर ली है. क्लेम म्यून्स्टर यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ लैंडस्केप इकोलॉजी में पढ़ाते हैं.

Fußgänger in Peking China Smog Umweltverschmutzung Nebel Umwelt

क्लेम मिल्किंग बताते हैं, "कोहरे में से पानी निकालना. वैसे ही जैसे आप स्वच्छ पानी के किसी भी स्रोत से करते हैं. ऐसा दुनिया के चुनिंदा हिस्सों में किया जा सकता है. आप एक बड़ा सा जाल लगाते हैं. इसे कोहरे वाले इलाकों में हवा में टांगा जाता है. इस जाल पर कोहरे की बूंदों को जमा कर लिया जाता है. जाल के नीचे पानी जमा करने का टैंक होता है और वहां से पानी को पीने के लिए सप्लाई कर दिया जाता है."

इतनी सीधी सी बात थी और दुनिया को इतनी देर से समझ में आई कि कोहरे में इतना पानी हो सकता है, जिसे पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन अब जब ऐसा सोच लिया गया है तो दुनिया की कई जगहों पर काम शुरू हो गया है.

मसलन लातिन अमेरिकी देश चिली के उत्तर में स्थित है एक शहर इकीक. यहां कोहरा ऐसा घना होता है कि इस क्षेत्र में अध्ययन करने वाले मौसम विज्ञानी इसे अपना मक्का मानते हैं. लेकिन और भी कई जगह हैं जहां कोहरे को दुहकर पानी निकाला जा रहा है.

डॉक्टर क्लेम के मुताबिक दक्षिण अमेरिका में चिली, पेरू, ग्वाटेमाला और इक्वेडोर में ऐसा हो रहा है. दक्षिण पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण अफ्रीका में प्रयोग हो रहे हैं. पूर्वी अफ्रीका में खासतौर पर इरिट्रिया में यह काफी सफल रहा है. दक्षिणी यूरोप में भी इस तरह की कुछ गतिविधियां चल रही हैं. मसलन स्पेन में कुछ काम किया जा रहा है.

डॉ. क्लेम स्पेन का जिक्र करते हैं. स्पेन की कहानी बड़ी दिलचस्प है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वहां आने वाले पचास साल में पानी की भारी कमी होने वाली है. यह कमी इस हद तक होगी कि पानी की बूंद बूंद को लोग तरसने लगेंगे. इसलिए वहां फौरन पानी के नए स्रोत खोजने जरूरी हैं. और कोहरा वहां होता है, तो इसे इस्तेमाल किया जा सकता है. असल में यह एक अद्भुत तकनीक है. इसमें कोई ज्यादा खर्च भी नहीं होता और बड़ी आसानी से पानी हासिल कर लिया जाता है.

वैसे सब कुछ इतना आसान भी नहीं है. असल में इस तकनीक की एक ऐसी जरूरत है, जिसके बिना सब कुछ बेकार है. और वह है...कोहरा, जो हर जगह नहीं होता. " आपको बहुत घने कोहरे की जरूरत होती है, लेकिन साथ ही हवा भी चाहिए. इसलिए ज्यादातर मामलों में आप ऐसे पहाड़ी इलाकों में ही इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं जो समुद्र के नजदीक हैं. समुद्र के ऊपर कोहरा तैयार होता है और जमीन की तरफ आता है. अगर वहां पहाड़ियां हैं तो ऊंचाई पर आप जाल लगाकर पानी जमा कर सकते हैं."

रिपोर्ट: एजेंसियां/वी कुमार

संपादन एस गौड़

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