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दुनिया

अब अमेरिका 'विश्व शक्ति नहीं', रूस-चीन पर पाकिस्तान की नजर

पाकिस्तान ने अमेरिका के विश्व शक्ति होने पर सवाल उठाए हैं. नवाज शरीफ के एक दूत का कहना है कि पाकिस्तान की बात नहीं सुनी गई तो वह रूस और चीन की तरफ जा सकता है.

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विशेष दूत मुशाहिद हुसैन सैयद इन दिनों अमेरिकी दौरे पर है. बुधवार को उन्होंने एक अमेरिकी थिंकटैंक अटलांटिक काउंसिल में एक कॉन्फ्रेस के समापन पर कहा, "अमेरिका अब विश्व शक्ति नहीं रहा. उसकी ताकत घट रही है. उसे भूल जाइए." सैयद और कश्मीर पर एक अन्य प्रतिनिधि शजरा मंसब के अमेरिकी दौरे का मकसद भारतीय कश्मीर में जारी अशांति और मानवाधिकारों के हनन के आरोपों पर दुनिया का समर्थन जुटाना है.

सैयद ने अमेरिका को चेतावनी देने वाले अंदाज में कहा कि अगर उसने कश्मीर और भारत को लेकर पाकिस्तान के रुख पर गौर नहीं किया तो उनका देश चीन और रूस की तरफ चला जाएगा. वो अटलांटिक काउंसिल में संवाद के दौरान पूछे एक सवाल का जबाव दे रहे थे. सैयद का ये बयान कैमरे में रिकॉर्ड नहीं है लेकिन उस कमरे में मौजूद लोगों ने स्पष्ट तौर पर इसे सुना.

सैयद ने कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत रिचर्ड ओल्सन को एक डोजियर भी सौंपा. चीन के साथ रिश्तों का जिक्र करते हुए सैयद ने कहा कि चीन दक्षिण एशिया में एक अहम रोल रखता है और चीन को उन्होंने व्यापक दक्षिण एशिया का हिस्सा बताया. उन्होंने ये भी कहा, "रूस के साथ पाकिस्तान के रिश्ते धीरे धीरे लेकिन मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं." इस सिलसिले में उन्होंने दोनों देशों के बीच हालिया साझा सैन्य अभ्यास का हवाला भी दिया.

सैयद ने कहा कि रूस की पुतिन सरकार पहली बार पाकिस्तान को हथियार बेचने के लिए राजी हुई है और अमेरिका को इस बदलते हुए समीकरण पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से, ओबामा प्रशासन के दौरान हमारे क्षेत्र को लेकर अमेरिकी विदेश नीति में दरार बढ़ी है. एक तरह का भ्रम रहा है और इस सिलसिले में कई नाकामियों को गिनाया जा सकता है."

उन्होंने कहा, "अगर आप काबुल में शांति की बात करते हो तो आपको ये भी सुनिश्चित करना होगा कि कश्मीर न जले. कश्मीर में अमेरिका के दीर्घकालीन हित हैं. वो भी संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों में एक पक्ष हैं. बोस्निया, कोसोवो और यहां तक कि कुर्दों के मामले में भी, अमेरिका ने दबे कुचले लोगों और दबे कुचले मुसलमानों के हक में बहुत अच्छी भूमिका अदा की है."

उन्होंने कहा, "तो सिर्फ कश्मीरियों को सिर्फ इसलिए कष्ट सहने के लिए छोड़ दिया जाए कि उनके पास तेल नहीं है या फिर वो यूरोप का हिस्सा नहीं है या फिर इसलिए कि कश्मीर के साथ एक विशेष धर्म जुड़ा हुआ है? हम इस तरह के मुद्दों पर दोहरे मानदंड नहीं रख सकते." उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की अपील भी की.

एके/वीके (पीटीआई)

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