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दुनिया

अफ्रीका में बढ़ी हाथीदांत की तस्करी

दुनिया भर में हाथीदांत की मांग बढ़ रही है. अफ्रीका में अब विद्रोही गुट भी इस कारोबार में उतर आए हैं. वो हाथियों की जान ले रहे हैं, ताकि उस पैसे से हथियार खरीद सकें.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून का कहना है कि जानवरों का अवैध शिकार दूसरे अपराधों से जुड़ा है, जो मध्य अफ्रीका की शांति पर खतरा बना हुआ है. यूगांडा में बान की मून की यह चेतावनी सच होती दिख रही है. वहां की लॉर्ड्स रेजिस्टेंस आर्मी हाथी दांत के अवैध कारोबार से पैसा कमाने में लगी है. एलआरए के नाम से जाने जाने वाले इस गुट को दुनिया के सबसे खूंखार गुटों में गिना जाता है. पिछले 25 साल में यह गुट एक लाख से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है और इतने ही बच्चों का अपहरण भी कर चुका है. इस गुट का नेता जोसेफ कोनी युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए 'वांटेड' है.

कांगो, सूडान और मध्य अफ्रीकी गणराज्य में यह गुट आज भी सक्रिय है. विश्लेषकों का मानना है कि पहले इस गुट को सूडान से आर्थिक मदद मिलती थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते इस पर रोक लगी गई. अब ये लोग हाथीदांत की तस्करी से पैसा बना रहे हैं.

नेशनल पार्क में हत्याएं

कुछ साल पहले इस गुट ने कांगो के गारम्बा नेशनल पार्क पर हमला बोला. पार्क के मैनेजर लुइस अरांज ने डीडब्ल्यू को बताया, "जनवरी 2009 में एलआरए के 180 लड़ाकुओं ने हमारे मुख्यालय पर हमला किया. हमारे स्टाफ के 17 लोग मारे गए." इसके बाद से एलआरए ने इस जगह को ही अपना अड्डा बना लिया. अब वो यहां हाथियों का शिकार करते हैं. पार्क के मैनेजर ने बताया, "हम यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि एलआरए ने पिछले साल 15 से 20 हाथियों की जान ली है".

अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस से ज्यादा आंकड़े नहीं हैं, लेकिन उन्हें शक है कि और भी कई हाथियों की हत्या की गई है. पर्यावरण और जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था वर्ल्ड वाइड लाइफ फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) का तो यहां तक मानना है कि गारम्बा पार्क में एक दिन में ही 20 हाथियों को मार दिया गया.

Elfenbeinhandel in Afrika

केवल 2012 में ही 30,000 हाथियों की जान गई.

दशकों से फैला है डर

अफ्रीका में विद्रोही सालों से प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर पैसा बना रहे हैं. 90 के दशक में अफ्रीका के सिएरा लिओन में विद्रोहियों ने 'ब्लड डायमंड' बेच कर पैसे बनाए. कांगो में वे धातु बेच कर हथियारों के लिए पैसे जमा करते रहे हैं. 80 के दशक में मोजांबिक के रेनामो गुट ने भी हाथीदांत के अवैध व्यापार से पैसे जमा किए. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के फोल्कर होम्स बताते हैं कि यह कोई नया तरीका नहीं है, "यह तो बहुत लंबे समय से चलता आया है, बस पहले यह छोटे स्तर पर था".

अफ्रीका में इन दिनों केवल एलआरए ही इस तस्करी में शामिल नहीं है. कैमरून में जंजावीद नाम का गुट हाथियों का शिकार कर रहा है. यह गुट सूडान से जुड़ा है. इसी तरह से केन्या में अल शबाब है जो सोमालिया से है. गारम्बा पार्क के मैनेजर का कहना है कि इस तरह के गुटों से मुकाबला करना बहुत मुश्किल है, "ये लोग अन्य शिकारियों की तुलना में बहुत अच्छी तरह संगठित हैं और इनके पास भारी मात्रा में हथियार हैं."

एशिया में बढ़ती मांग

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का कहना है कि अफ्रीका में कभी हाथियों का इस स्तर पर शिकार नहीं हुआ, जितना अब हो रहा है. केवल 2012 में ही 30,000 हाथियों की जान गई. फोल्कर होम्स बताते हैं, "यह चौंका देने वाला है. एशिया के कई हिस्सों में हाथीदांत को निवेश की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके दाम में भी बहुत वृद्धि हुई है. अब एक किलो कई सौ यूरो में बिकता है."

चीन में हाथी दांत को लेकर काफी दीवानगी है. लोग ना केवल इस से बने शिल्प और गहनों में रूचि लेते हैं, बल्कि हाथीदांत को कामोत्तेजक दवाएं बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके कारण वहां काला बाजारी बढ़ गयी है. केन्या और तंजानिया से चीन में हाथीदांत भेजा जाता है, जो मलेशिया और फिलिपीन्स से होते हुए जाता है. होम्स बताते हैं कि इन्हें लकड़ी के साथ भेजा जाता है.

एलआरए अमेरिका और अफ्रीकी संघ दोनों के निशाने पर है, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली हैं. गारम्बा पार्क के मैनेजर अरांज का मानना है कि उन्हें पार्क में ही मार गिराया जा सकता है. बाजार में हाथीदांत की मांग को देखते हुआ कहा जा सकता है कि कम से कम आने वाले कुछ साल तो पार्क में एलआरए का अड्डा बना ही रहेगा.

रिपोर्ट: लॉरा मारी रोथे /आईबी

संपादन: आभा मोंढे

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