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दुनिया

अफ़ग़ानिस्तान में जर्मन विकास सहायता मंत्री

जर्मन विकास सहायता मंत्री डिर्क नीबेल अफ़ग़ानिस्तान गए हुए हैं. उनका कहना है कि हालांकि पुनर्निर्माण के क्षेत्र में प्रगति हुई है, लेकिन प्रशासन, भ्रष्टाचार निवारण और सुरक्षा के क्षेत्र में बहुत सारी समस्याएं हैं.

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अफ़ग़ानिस्तान में नीबेल

यात्रा से पहले उन्होंने एक साक्षात्कार में इन पर प्रकाश डाला. आठ साल पहले वे आख़िरी बार अफ़ग़ानिस्तान गए थे. उस समय के साथ तुलना करते हुए उन्होंने कहा -

आठ साल पहले जब मैं तत्कालीन विदेश मंत्री फ़िशर के साथ अफ़ग़ानिस्तान गया था, तो वह स्माइल ऐंड वेव का दौर था, जब हमारे सैनिक खुली गाड़ियों में कस्बों में जाते थे, गांवों में बिना सुरक्षा के घूमते थे . लोग मेहमानों के तौर पर उनका स्वागत करते थे और वे उसका जवाब देते थे - यह सब अब बदल चुका है. ख़तरे अब कहीं ज़्यादा बढ़ गए हैं. - डिर्क नीबेल

विकास सहायता मंत्री की यात्रा के दौरान भी सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त किया गया है. हमलों के डर से उनकी यात्रा का कार्यक्रम गुप्त रखा गया है. सबसे पहले वे काबुल में अफ़ग़ान सरकार के प्रतिनिधियों से मिलेंगे. अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामीद करज़ई से बात होगी. डिर्क नीबेल का कहना है कि मैत्रीपूर्ण वातावरण में बातचीत होगी. लेकिन साथ ही वे कहते हैं -

ज़ाहिर है कि अफ़ग़ान सरकार के साथ मिलकर ही कुछ किया जा सकता है . उसे लंदन में की गई अपनी घोषणाओं पर अमल करना पड़ेगा. यानी उसे प्रशासन में बेहतरी लानी होगी, भ्रष्टाचार से निपटना होगा और जनता का विश्वास प्राप्त करना पड़ेगा. यह पूर्वशर्त है कि हम असैनिक क्षेत्रों में अपने कामों के ज़रिये अफ़ग़ान अधिकारियों को ज़िम्मेदारी सौंप सकें. - डिर्क नीबेल

जर्मन सरकार की अफ़ग़ान नीति में बदलाव आ रहा है, अब पुनर्निर्माण पर अधिक ज़ोर दिया जा रहा है. वित्तीय मदद बढ़ाकर उसे 43 करोड़ यूरो तक पहुंचाया जा रहा है. लेकिन नीबेल का कहना है कि राहत संगठनों को जर्मन सेना के साथ सहयोग से काम करना पड़ेगा, नहीं तो उन्हें उनके मंत्रालय से मदद नहीं मिलेगी. वे कहते हैं -

जो अफ़ग़ानिस्तान के उत्तर में जर्मन राजनीति के साथ जुड़कर काम नहीं करना चाहता है, वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन फिर उसे विकास सहायता मंत्रालय से अतिरिक्त संसाधन नहीं मिलेंगे. - डिर्क नीबेल

रिपोर्ट: मार्क क्लेबर/उभ

संपादन: राम यादव

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