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जर्मन चुनाव

अफगान अभियान जरूरी हैः वेस्टरवेले

अफ़ग़ानिस्तान में सैनिक अभियान के प्रति पश्चिमी देशों की जनता में संदेह बढ़ता जा रहा है. जर्मनी में भी. जर्मन विदेश मंत्री का कहना है कि इसके बावजूद वहां बने रहना ज़रूरी है, लेकिन वापसी की योजना होनी चाहिए.

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जर्मनी के विदेश मंत्री गीदो वेस्टरवेले ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति आने वाले दिनों में बदतर हो सकती है. इसके बावजूद उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान अभियान व उसमें जर्मन सेना की शिरकत की वकालत की. डॉएचे वेले टीवी के आलेक्ज़ांडर कुदाशेफ़ के साथ साक्षात्कार में उन्होंने इस सिलसिले में कहा

मैं समझता हूं कि यह एक ऐसा मामला है जो किसी को पसंद नहीं है, ख़ासकर अगर राजनीतिक ज़िम्मेदारी निभानी हो. वहां सेना भेजने का फ़ैसला पिछली सरकार का था, और अब हम यह ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं. साथ ही हमें अपनी सुरक्षा का ख़्याल रखना है, आतंकवादी हमलों से नागरिकों को बचाना है. इसके अलावा हमारी इसमें गहरी दिलचस्पी है कि अफ़ग़ानिस्तान आगे बढ़े, वहां स्थिरता आए. - गीदो वेस्टरवेले

क्या अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा व पुनर्निर्माण के सिलसिले में स्थिति बेहतर हुई है. इस सवाल के जवाब में विदेश मंत्री गीदो वेस्टरवेले का कहना था -

स्थिति मिली-जुली है. मुझे डर है कि सुरक्षा के मामले में बदतरी हो सकती है. फ़सल काटने का मौसम ख़त्म होने के बाद ऐसा देखा गया है. दूसरी ओर, अफ़ग़ानिस्तान के उत्तर में 134 ज़िले हैं. इनमें से सिर्फ़ 8 ज़िलों में सुरक्षा की स्थिति ख़ास तौर पर ख़राब है. इसका मतलब है कि हमने न सिर्फ़ सड़क, स्कूल या लड़कियों के स्कूल बनाए हैं, बल्कि इस क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता में भी हमने योगदान दिया है. हम सन 2014 तक अफ़ग़ान सरकार को ज़िम्मेदारी सौंपना चाहते हैं. राष्ट्रपति करज़ई का भी यही लक्ष्य है और काबुल के पिछले अफ़ग़ानिस्तान सम्मेलन में इस लक्ष्य की पूष्टि की गई है. - गीदो वेस्टरवेले

अफ़ग़ानिस्तान के सिलसिले में पड़ोसी देशों की भूमिका के सिलसिले में जर्मन विदेश मंत्री गीदो वेस्टरवेले का कहना था -

यहां भी सफलताएं देखी जा सकती हैं. मिसाल के तौर पर, अफ़ग़ानिस्तान सम्मेलन से पहले-पहले अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक व्यापार समझौता हुआ. दोनों देशों के संबंधों को देखते हुए यह एक बड़ी घटना है. सफलता के लिए क्षेत्रीय सहयोग की ज़रूरत है. लंदन में हुए अफ़ग़ानिस्तान सम्मेलन में एक देश नहीं था. लेकिन उसके बाद काबुल में हुए सम्मेलन में इस क्षेत्र के सभी देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे. हम इसे प्रोत्साहन देना चाहते हैं. - गीदो वेस्टरवेले

इंटरव्यु: आलेक्ज़ांडर कुदाशेफ़

संपादन: उभ/वी कुमार

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