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दुनिया

अफगानिस्तान में सलाहकार की हत्या

अफगानिस्तान में एक महिला पुलिसकर्मी ने काबुल पुलिस मुख्यालय में एक अमेरिकी सलाहकार को मार दिया. 2014 में विदेशी सैनिकों की वापसी से पहले ऐसे हमलों ने नाटो को चिंता में डाल दिया है.

हमले की वजह पूरी तरह से साफ नहीं हैं. नाटो सैनिकों के प्रवक्ता ने इसे अंदरूनी हमला कहा है तो उप पुलिस प्रमुख मोहम्मद दाउद अमीन ने कहा है कि अभी तक साफ नहीं है कि हमला जानबूझ कर किया गया या यह दुर्घटना थी. अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने इस घटना की पुष्टि की और कहा कि मामले की छानबीन की जा रही है.

इंटरनेशनल सिक्योरिटी असिस्टेंस फोर्स (आईएसैफ) के प्रवक्ता हैगन मेसर ने बताया कि अफगान पुलिस की वर्दी पहने एक महिला के गोली चलाने से आईसैफ के एक असैनिक कर्मचारी मौत हो गई है. प्रवक्ता ने कहा कि इस महिला को हिरासत में ले लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है. स्थानीय पुलिस के अनुसार मृतक अफगान पुलिस का अमेरिकी सलाहकार था, लेकिन नाटो टुकड़ी ने इसकी पुष्टि नहीं की है. यह भी नहीं बताया गया है कि वह सैनिक या असैनिक सलाहकार था.

Afghanistan Polizei

पुलिस मुख्यालय में हमला

तालिबान की घुसपैठ

उत्तरी अफगानिस्तान में जोव्जजान प्रांत में एक स्थानीय पुलिस कमांडर ने अपने पांच साथियों को गोली मार दी. कुश टेपा जिले के पुलिस प्रमुख अब्दुल अजीज गैरात के अनुसार पुलिस पोस्ट के कमांडर दूर मोहम्मद ने एक चेक प्वाइंट पर अपने साथियों को गोली मार दी. "हमलावर उसके बाद भाग गया और मृतकों के हथियार और गोली बारूद लेकर तालिबान से जा मिला." गैरात के अनुसार मारे गए पुलिसकर्मियों को अमेरिकी सैनिकों ने आंतरिक सुरक्षा की ट्रेनिंग दी थी.

कुश टेपा हाल तक तालिबान कट्टरपंथियों के नियंत्रण में था, लेकिन अधिकारियों के अनुसार अब सरकारी नियंत्रण में है. तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि हमलावर आठ हथियारों और तीन मोटर साइकिल के साथ उनसे आ मिला है.

हाल में नाटो सेना पर अफगान सैनिकों के लगातार बढ़ रहे हमलों ने दोनों के बीच भरोसे को तोड़ा है. नाटो का कहना है कि अंदर से हुए इन हमलों में 25 फीसदी हाथ तालिबानी घुसपैठियों का है जबकि बाकी मामले सांस्कृतिक और आपसी मतभेदों के कारण हुए हैं. हालांकि यह पहली बार है कि किसी महिला सिपाही ने भी हमला किया है.

Taliban

पिछले हफ्ते पकड़े गए तालिबान

भीतर से होने वाले हमलों की एक वजह यह भी है कि कट्टरपंथी तालिबान ने अफगान सुरक्षा बलों में घुसपैठ कर ली है. विदेशी सैनिकों की तयशुदा वापसी के कारण अफगान सैनिकों की पर्याप्त संख्या में जल्द ट्रेनिंग पर जोर दिया जा रहा है. इसकी वजह से तालिबान अपने लड़ाकों की सुरक्षाबलों में आसानी से घुसपैठ कराने में कामयाब हुआ है.

नाटो परेशान

इस साल आंतरिक हमलों के ऐसे मामलों में करीब 60 नाटो सैनिक अफगानी सैनिकों के हाथों जान गंवा चुके हैं. हाल ही में ऐसे ही एक मामले में एक ब्रिटिश सैनिक की भी हत्या हुई थी. आइसैफ के कमांडर जनरल जॉन एलन ने कहा, "जिस तरह घरेलू बम इराक युद्ध की पहचान थे वैसे ही ये हमले भविष्य में बढ़ने वाले आंतरिक हमलों और मतभेदों की तरफ इशारा करते हैं." इससे निबटने के लिए नाटो सैनिकों को इस बात की ताकीद है कि वे सैनिक बेस में भी अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा खुद तैयार रहें. उन्हें इस सिलसिले में एक गाइडलाइन भी दी गई है.

नाटो 2014 के अंत तक विदेशी सैनिकों की वापसी से पहले अफगानिस्तान के साढ़े तीन लाख सैनिकों को प्रशिक्षण देना चाहता है जिससे कि सुरक्षा जिम्मेदारी पूरी तरह राष्ट्रपति करजई के प्रशासन को सौंपी जा सके. ज्यादातर पश्चिमी देश इससे पहले ही अपनी सेना को वापस बुलाना चाहते हैं. इन हमलों के चलते वापसी के खिलाफ विरोध की आवाजें बढ़ती जा रही हैं. नाटो ने कहा है उनके लिए यह स्थिति चिंताजनक है.

एसएफ/ओएसजे (एएफपी)

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