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जर्मन चुनाव

अफगानिस्तान में संसद के लिए मतदान

तालिबान का खौफ और गठबंधन फौजों के साए में अफगान की जनता आज वोसेली जिरगा के लिए वोट डाल रही है. सत्ता से तालिबान के हटने के बाद दूसरी बार चुनाव का मुद्दा भी पुराना है और हालात भी पुराने, बदला है तो बस वक्त.

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अफगानिस्तान में चुनाव शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले काबुल में धमाका हुआ. गठबंधन सेना के अधिकारियों ने धमाके की तो पुष्टि की लेकिन ये नहीं बताया कि धमाका किसने किया या कितने लोगों की मौत हुई. तालिबान चुनावों को न होने देने पर अमादा है और उसकी पूरी कोशिश लोगों को वोट डालने से रोकने की है.

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हर तरफ लगे हैं चुनाव के पोस्टर

ये चुनाव देश में सरकार के स्थायित्व का टेस्ट भी हैं जिनकी सफलता ही दिसंबर में राष्ट्रपति बराक ओबामा के अफगानिस्तान पर फैसले की दिशा तय करेगी. यही वजह है कि तालिबान किसी भी हाल में इन चुनावों को सफल नहीं होने देना चाहता. उसने पहले ही लोगों को इससे दूर रहने की चेतावनी दे दी है. तालिबान ने साफ कहा है कि वो मतदान केंद्रों पर हमला करेगा जिसमें वोट डालने आए लोगों की जान भी जा सकती है.

अफगानिस्तान की संसद के निचले सदन वोलेसी जिरगा की कुल 249 सीटों के लिए 2514 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें से 68 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और 406 महिलाएं इन पर अपना हक जमाने के लिए चुनाव मैदान में उतरी हैं. कुल 1 करोड़ पांच लाख मतदाता अपना वोट डालेंगे. मतदान स्थानीय समय के अनुसार सुबह सात बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा. चुनाव के लिए 5816 केंद्र बनाए गए हैं. सुरक्षा देने में नाकाम रहने के कारण 1000 मतदान केंद्रों को रद्द कर दिया गया है.

चुनाव आयोग ने मीडिया और अंतररराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों समेत कुल 3 लाख पर्यवेक्षक तैनात किए हैं. सुरक्षा के लिए भी कड़े इंतजाम हैं. अफगान आर्मी के 63 हजार और पुलिस के 52000 सिपाही सुरक्षा में तैनात हैं. इनके अलावा नैटो के डेढ़ लाख सैनिक किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार खड़े हैं.

दो महीनों के चुनाव प्रचार अभियान में सभी सार्वजनिक जगहों पर दीवारें नारों और पोस्टरों से रंग गई हैं. चुनाव में उम्मीदवारों की छवि पर लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा है वैसे भ्रष्टाचार, शिक्षा, बेरोजगारी और असुरक्षा चुनाव में बड़े मुद्दे हैं. लोगों में चुनाव के लिए उत्साह है और वो किसी भी कीमत पर वोट डालने की बात कह रहे हैं. काबुल में दुकान चलाने वाले 19 साल के अब्दुल मोसावर ने कहा, "मैं तालिबान की धमकी से नहीं डरता और मैं अपना वोट जरूर डालूंगा. मुझे संसदीय चुनाव से बहुत उम्मीदें हैं क्योंकि कई उम्मीदवार युवा और देशभक्त हैं."

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः महेश झा

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