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दुनिया

अफगानिस्तान में भ्रष्टाचार फैलाता अमेरिका

अमेरिका कई साल अफगानिस्तान को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर खरी खोटी सुनाता आया. आरोप लगाता रहा कि वह ठोस कदम नहीं उठा रहा. अब पता चला है कि सीआईए करजई के करीबी लोगों में रहने लिए एक दशक से रिश्वत दे रही है.

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन अफगानिस्तान में भ्रष्टाचार फैलाने में सबसे बड़ा कारण हो सकता है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए कई साल से अफगान राष्ट्रपति के ऑफिस डॉलर से भरे सूटकेस भिजवा रही है ताकि अफगानिस्तान में वह प्रभाव खरीद सके. वहीं ब्रिटेन के अखबार गार्डियन ने रिपोर्ट दी है कि एमआई6 ने भी करजई के ऑफिस को नगद भुगतान किया है ताकि तालिबान और करजई सरकार के बीच की बैठक आगे बढ़े.  कहा जा रहा है कि सीआईए ने एक दशक के दौरान कई हजार डॉलर दिए. लड़ाकों के नेताओं और राजनीतिज्ञों को काफी पैसा दिया गया ताकि उनकी निष्ठा खरीदी जा सके.  

भष्टाचार के पीछे अमेरिका

2010 में इस तरह की खबरें आईं थीं कि ईरान ने करजई के नजदीकी सलाहकारों को खरीद कर प्रभाव जमाने की कोशिश की. उस समय व्हाइट हाउस ने ऐसे किसी भी उपाय में शामिल होने से इनकार किया था.

रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिक रिपब्लिक ने अमेरिका और अफगानिस्तान के बीच 2012 में रणनीतिक साझेदारी होने के बाद भुगतान बंद कर दिया. लेकिन सीआईए अफगान राष्ट्रपति कार्यालय को पैसा भेजता रहा. न्यूयॉर्क टाइम्स ने अनाम अधिकारी के हवाले से लिखा है, "अफगानिस्तान में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण अमेरिका था."

करजई ने सोमवार को इस तथ्य की पुष्टि की कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को सीआईए से लगातार पैसे मिल रहे थे लेकिन "इन्हें अभियान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था और घायलों, बीमारों, घरों के किराए और दूसरे कामों के लिए भी." हेलसिंकी में रिपोर्टरों से करजई ने कहा, "हां राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय को अमेरिका से पिछले दस साल से पैसे मिल रहे थे. लेकिन ज्यादा नहीं. छोटी मात्रा में. इसे अलग अलग कामों के लिए इस्तेमाल किया गया." 

गोपनीय पैसा

जिसे करजई खुले आम सहायता राशि बता रहे हैं, चाहे वह ज्यादा हो या कम, उसे दूसरे मानकों पर भ्रष्टाचार कहा जा सकता है. काबुल में गैर सरकारी संगठन अफगानिस्तान वॉच के नमातुल्लाह इब्राहिमी देश में साफ और गंदे पैसे में अंतर करना मुश्किल काम बताते हैं. भ्रष्टाचार अकसर अनुभव का मामला होता है. डॉयचे वेले से बातचीत में उन्होंने बताया," अफगानिस्तान के हालात में अधिकारिक सहायता राशि जो किसी देश की सरकार अफगान सरकार को देती है और गोपनीय धन जो बाहरी सरकार अफगानिस्तान में एक स्तर का प्रभाव बनाए रखने के लिए देती है, इसके बीच कोई साफ अंतर नहीं किया जा सकता."

न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ बातचीत में करजई के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ खलील रोमन ने इस भुगतान को घोस्ट पेमेंट का नाम दिया. और बताया कि "यह गुपुचुप तरीके से आता था और वैसे ही चला जाता."  

2001 में अमेरिकी नेतृत्व में किए गए हमले के साथ वॉशिंगटन और साथी देशों ने अफगानिस्तान में खूब पैसा बहाया. अकसर खराब समन्वय और खराब प्रबंधन के साथ. इससे उन अफगानों की जेबें भरीं जो अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ काम कर रहे थे. इब्राहिमी के मुताबिक, "देश में अचानक बड़ी मात्रा में पैसा आने लगा. इसे अलग अलग लोग, अलग अलग कारणों और तरीकों से भेज रहे थे. इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है अगर आप इतना सारा पैसा कुछ लोगों या ग्रुप के हाथ में देते हैं और ये लोग कुछ ही साल में बहुत अमीर हो जाते हैं."

ऐतिहासिक नमूना

संयुक्त राष्ट्र नशीली दवा और अपराध कार्यालय के मुताबिक अफगानिस्तान में भ्रष्टाचार बढ़ती और बड़ी समस्या है. आंकड़ों के मुताबिक 2012 में 3.9 अरब डॉलर भ्रष्टाचार की बलि चढ़े, यह अफगानिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद का 20 फीसदी है. संयुक्त राष्ट्र के इस विभाग का यह भी कहना है कि 2009 से 2012 के बीच अफगानिस्तान में भ्रष्टाचार 40 फीसदी बढ़ गया.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल अफगानिस्तान को दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों में सबसे ऊपर बताता है. सिर्फ उत्तर कोरिया और सोमालिया में अफगानिस्तान से ज्यादा रिश्वतखोरी होती है. यह ट्रांसपेरेंसी के 2012 के आंकड़ें हैं. रिपोर्टों के मुताबिक 2010 में करीब 61 प्रतिशत अफगान लोगों ने रिश्वत दी. अफगानिस्तान मामलों के विशेषज्ञ स्टीफन बिडल ने डॉयचे वेले से बातचीत में बताया," अफगानिस्तान में रिश्वतखोरी ऐतिहासिक स्तर पर है और यह मुख्य तौर पर जिस तरह से पश्चिम ने यहां पैसा फेंका है उसका कारण है."

लड़ाई के कारण

राष्ट्रपति हामिद करजई अकसर वॉशिंगटन पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह रिश्वतखोरी बढ़ा रहे हैं खास कर जिस तरीके से वह अफगानिस्तान में 2001 से युद्ध लड़ रहे हैं. उन्होंने विशेष तौर से कहा था कि भ्रष्टाचार अमेरिकी रक्षा अनुबंध का उत्पाद है. करजई ने अमेरिकी रेडियो एनबीसी को दिसंबर 2012 के दौरान एक इंटरव्यू में कहा था, "ये कॉन्ट्रैक्ट अफगान सरकार ने नही जारी किए. ये अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जारी किए और खासकर अमेरिका ने. अब अफगानिस्तान में ये भ्रष्टाचार दुर्घटना है या 10 साल पहले के हालात की पैदाइश या फिर इसे भी जान बूझ कर किया गया है, ये मुख्य मुद्दा है."

खराब कानूनी स्थिति

बिडल कहते हैं कि वॉशिंगटन ने अक्सर अच्छे प्रशासन के लंबे समय के लक्ष्यों को बलि चढ़ाते हुए शॉर्ट टर्म सुरक्षा पर ध्यान दिया और इसके लिए थोड़ी रिश्वत भी सहन की बशर्ते इससे काम हो जाए. बिडल के मुताबिक, कम समय के लिए शायद ये आयडिया अच्छा लग सकता है कि कल गड्ढा खुद जाने के लिए थोड़ी रिश्वत दे दी जाए या लंबे समय से सरकार विरोधी लड़ाके नेता को पैसे दे दिए जाएं. लेकिन कुछ ही समय के लिए यह लड़ाकों को जमीन पर रखेगा और तालिबान दूर रहेगा ताकि आप सुरक्षित रहें.

अफगानिस्तान में कुछ लोगों ने धन बंटवारे में अपारदर्शिता का फायदा उठाते हुए खूब मुनाफा कमाया है. इब्राहिमी चेतावनी देते हैं कि सिर्फ पैसा ही एक समस्या नहीं. " सरकार भी इसमें भागीदार है क्योंकि वह नियंत्रण करने की स्थिति में नहीं और इसके लिए जिम्मदार लोगों को कटघरे में लाने के लिए भी नहीं. अफगानिस्तान में कानून की स्थिति खराब है. और हम देश में मुख्य तौर पर भ्रष्ट और बेकार अदालती प्रणाली से जूझ रहे हैं.

रिपोर्टः मिषाएल क्निगे, मसूद जाहिष/एएम

संपादनः एन रंजन

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