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दुनिया

अफगानिस्तान में भड़कीली शादियों पर पाबंदी की तैयारी

धूम धड़ाके, गाजे बाजे और नाच गाने के साथ होने वाली भड़कीली शादियों पर तालिबान ने पाबंदी लगाई थी अब अफगानिस्तान करजई सरकार भी ऐसी शादियों को सादगी लाने की तैयारी में जुट गई है.

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काबुल के सिटी स्टार हॉल में अंदर घुसने के लिए चमकीला चांद खड़ा है. मेहमान जब इस रास्ते से गुजरते हैं तो उन्हें चांद पर पहुंचने का ही अहसास होता है. अंदर चांदी के बने बड़े सितारों की छांव में शादी और मेहमानों की आवभगत की तैयारी है. यहां दूल्हा दुल्हन के बैठने की जगह के सामने बड़ा सा फव्वारा है और यहां तक पहुंचने के लिए उनके कदम जहां जहां पड़ते हैं वहां रोशनी की जगमग और फूलों की पंखुड़ियां भी हैं. तीन महीने पहले 25 करोड़ रुपये खर्च करके ये शादी घर बनवाया गया. शादी घर के सौ से ज्यादा स्टाफ मेहमानों की आवभगत की तैयारी में जुटे हैं.

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इसमें शादी के लिए चार हॉल हैं और हर महीने यहां 70 शादियां होती हैं. इनमें से हर में करीब 800 से 1000 मेहमान होते हैं. एक मेहमान के खाने का खर्च 500 रुपये से 1000 रुपये तक है. संगीत, केक, सजावट और फोटोग्राफी का खर्च अलग. शादीघर के मैनेजर जबी मुजीब ने बताया कि शहरों में रहने वाले लोग ज्यादा मेहमान नहीं बुलाते लेकिन शहर से बाहर रहने वाले लोगों की शादियों में खूब मेहमान आते हैं. कई बार तो मेहमानों की तादाद 1600 से 1800 तक पहुंच जाती है. पिछले नौ सालों में काबुल और आस पास के इलाकों में ऐसे कई महंगे शादीघर तैयार हो गए.

24 साल के रफी काजिमी की अक्टूबर में फारिमा से शादी पर उनके परिवार ने करीब पांच लाख रुपये खर्च किये. 600 से ज्यादा मेहमानों ने जम कर दावत उड़ाई अब टैक्सी ड्राइवर काजिमी के परिवार पर तीन लाख रूपये का कर्ज है. हाल ही में काजिमी की नौकरी भी चली गई. उनकी पत्नी, मां, पिता, दादा, दो बहनों, तीन भाई और उनकी पत्नियों के खर्च का बोझ बड़े भाई की 17000 रूपये मासिक तनख्वाह पर है. इनमें से करीब 12 हजार तो बैंक का कर्ज चुकाने में ही खर्च हो जाते हैं.

शादी के बाद अब काजिमी की सबसे बड़ी चिंता ये कर्ज है. काजिमी कहते हैं, "बहुत ज्यादा खर्च हो गया, मैं बहुत चिंता में था कि पैसा कैसे आएगा लेकिन मेरी बीवी के घरवालों को इस बात की जरा भी चिंता नहीं कि मेरे पास पैसा है या नहीं वो तो बस इसी बात पर जोर देते रहे कि शादी का इंतजाम जबर्दस्त होना चाहिए." शादी के महंगे इंतजाम के अलावा दूल्हे के परिवार को दूल्हा दुल्हन के लिए बेशकीमती कपड़े भी बनवाने पड़ते हैं. काजिमी भड़कीली शादियों पर पाबंदी लगाए जाने के पक्ष में हैं हालांकि उन्हें इस बात की आशंका है कि लोग इसे स्वीकार करेंगे या नहीं.

NO FLASH Bundeswehr Bombardement Afghanistan 2009

जंग के दौर में भी फिजूलखर्ची

अफगानिस्तान पर अमेरिकी फौज के हमले के बाद तालिबान की कमान ढीली पड़ते ही वहां रंग बिरंगी शादियों का मौसम लौट आया. 20 हजार रुपये सालाना प्रति व्यक्ति आय वाले देश में लोग लाखो रूपये शादियों पर खर्च कर देते हैं.

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