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दुनिया

अफगानिस्तान में फिर 'पत्थर मार कर मौत' की सजा

अफगानिस्तान में गैरकानूनी रूप से शारीरिक संबंध बनाने पर पत्थर मार कर मौत की सजा को फिर से लाने के लिए कानूनी प्रस्ताव की बात सामने आई है. मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने अफगान सरकार से इसे नामंजूर करने मांग की है.

सजा जितनी सख्त होगी लोग अपराध करने से उतना ही डरेंगे, यह आम सोच है. कई देशों और समाज के कई तबकों में प्यार करना या शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाना घोर अपराध माना जाता है. परिवार के सम्मान के लिए प्रेम करने वालों को सरे आम जनता के हाथों पत्थर मार कर मौत की सजा देना भी इन समाजों में सही ठहराया जाता रहा है. अफगानिस्तान में भी सालों से ऐसा ही होता रहा, लेकिन फिर इसे गैरकानूनी करार दिया गया. अब इस तरह के कानून को फिर से लागू करने के लिए प्रस्ताव की बात सामने आई है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने अफगान सरकार से कहा है कि वह ऐसे किसी कानून को पास ना करे. हालांकि अफगान सरकार ने ऐसे किसी प्रस्ताव के होने से ही इनकार कर दिया है.

बुरे परिणामों की चेतावनी

अफगानिस्तान के न्याय मंत्रालय की देख रेख में एक कार्यकारी समिति अफगानिस्तान की नई दंड संहिता पर काम कर रही है. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि समिति ने शादी से बाहर शारीरिक संबंध बनाने के मामलों में यह सजा प्रस्तावित की है. उनका कहना है, "अंतराष्ट्रीय दाता, यानि वो भी जो अफगानिस्तान में कानून व्यवस्था को सुधारने में मदद कर रहे हैं, उन्हें चाहिए कि वे राष्ट्रपति हामिद करजई को यह बात साफ कर दें कि अगर इस तरह का कनून दंड संहिता में शामिल हुआ तो इससे सरकार को दी जाने वाली आर्थिक मदद पर नकारात्मक असर पड़ेगा."

ह्यूमन राइट्स वॉच के एशिया निदेशक ऐडम्स ने कहा, "राष्ट्रपति करजई को मानवाधिकारों के प्रति मूल जिम्मदेरी तो दिखानी चाहिए और प्रस्ताव तुरंत ही नामंजूर कर देना चाहिए." संगठन का कहना है कि ड्राफ्ट के अनुसार अगर शारीरिक संबंध बनाने वाले गैर शादीशुदा होंगे तो उन्हें 100 कोड़े मारने की सजा मिलेगी. उनका कहना है कि 1976 के तालिबानी कानूनों में पत्थर मार कर मौत की सजा का कोई प्रावधान नहीं था.

नई दंड संहिता

न्याय मंत्रालय के दंड कानून विभाग के प्रमुख मुहम्मद अशरफ आजमी का कहाना है कि इस तरह का कोई प्रस्ताव अब तक उनके पास नहीं आया है, "सजा संबंधी कानूनों के विभाग का सदस्य होने के नाते ऐसी कोई बात अभी तक मेरे सामने नहीं आई है जिसकी वे चर्चा कर रहे हैं. मुझे नहीं पता कि उन्हें यह बात कहां से पता चली और क्यों वह इस पर इतना जोर दे रहे हैं."

आजमी ने कहा कि नई दंड संहिता को तैयार करने में करीब दो साल का समय और लगेगा. तब ही पुराने कानूनों को हटाया जा सकेगा जो 1976 में बने थे. उन्होंने बताया कि दो साल पहले जब इस पर काम शुरू हुआ था तब अंतरराष्ट्रीय संगठन भी इसमें काफी बड़े स्तर पर शामिल थे.

आजमी ने बताया कि अफगानिस्तान के इस्लामिक गणराज्य होने के नाते कार्यकारी समिति का काम था इस्लामी शरिया कानून को ध्यान में रखना. इसीलिए शादी के बाहर संबंधों जैसे मामलों पर भी गौर किया गया. यह अफगानिस्तान में दंडनीय अपराध है जिसमें 15 साल तक की सजा हो सकती है.

न्याय मंत्रालय के अधिकारी अब्दुल रहीम दकीक ने कहा कि मौजूदा दंड संहिता में जो भी परिवर्तन लाए जाएंगे वे ऐसें होंगे जिनसे अंतरराष्ट्रीय कंवेंशन की अवहेलना ना हो जिन पर अफगानिस्तान ने हस्ताक्षर किए हैं.

तालिबान का प्रभाव

तालिबान के प्रभाव में अफगानिस्तान में पत्थर मार कर मौत की सजा देना आम बात थी. लेकिन अमेरिका के दखल देने के बाद से इसमें फर्क आया और सरेआम ऐसी सजाएं बंद हो गईं. इस हफ्ते अफगानिस्तान में ऐसे ही एक मामले में रिश्तेदारों के हाथों पत्थर मार कर एक जोड़े की मौत की खबर आई. इसके बाद अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय ने मामले की जांच के आदेश दिए. घटना तालिबान के प्रभाव वाले उत्तरी बगलान जिले में हुई.

गृह मंत्रालय के अनुसार यह आदिवासी परिवार के बड़े बूढ़ों के हाथों लिया गया गैर कानूनी फैसला था. अफगानिस्तान के रूढ़िवादी समाज में परिवार के सम्मान के लिए होने वाली इस तरह की घटनाएं आम हैं. खासकर उन इलाकों में जहां तालिबान का भारी प्रभाव है.

महिलाओं से जुड़े मामलों की क्षेत्रीय प्रमुख खदीजा अकील ने बताया कि पिछले दिनों एक 28 साल का शादीशुदा पुरुष 25 साल की एक शादीशुदा युवती के साथ गांव छोड़ कर भाग गया. लेकिन रास्ते में ही उनकी गाड़ी खराब हो गई, "उन्हें पकड़ लिया गया और जब पुलिस वहां पहुंची तो गांव वालों ने कहा कि हमने उन्हें अपने तरीके से सजा दे दी है."

पहले गांव वाले उन्हें पत्थरों से मारने जा रहे थे लेकिन बाद में उन्हें गोली मार दी गई. उन्होंने बताया कि इसके बाद लोगों ने लड़के की आंखें निकाल लीं और उसके शरीर को चाकू से गोद दिया. बगलान के गलर्वर ने बताया कि उन दोनों को लड़की के पिता ने मारा. अधिकारियों के अनुसार पुलिस को मारने वालों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए हैं.

एसएफ/आईबी (एपी, डीपीए)

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