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दुनिया

अफगानिस्तान में अपनी रणनीति बदलें ओबामा

बराक ओबामा की अफगान रणनीति प्रभावी साबित नहीं हो रही है और अगर पाकिस्तान आतंकवादी गुटों से दूर नहीं होता और भारत पर हमले जारी रहे, तो भारत पाक के बीच युद्ध छिड़ सकती है. एक नई रिपोर्ट का दावा.

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अमेरिका के पूर्व रक्षा उपमंत्री रिचर्ड आर्मिटेज की प्रमुखता में एक स्वतंत्र टास्क फोर्स ने शुक्रवार को अफगान युद्ध पर अपनी जांच के नतीजे पेश किए. उनका साथ पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सैम्युएल बरजर दे रहे थे. 98 पन्नों की रिपोर्ट में लिखा है कि अफगानिस्तान में अस्पष्ट स्थिति और युद्ध की बढ़ती कीमत से सवाल पैदा हो गया हैः क्या अमेरिका को अफगानिस्तान को लेकर उसकी महत्त्वाकांक्षा और साथ ही अपनी सेना कम करनी चाहिए?

टास्क फोर्स ने ओबामा सरकार से पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाने को कहा है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के साथ व्यापार संबंध बेहतर करने की भी कोशिश की जानी चाहिए. पाकिस्तान अगर हक्कानी नेटवर्क और लश्कर ए तैयबा जैसे इस्लामी उग्रवादी संगठनों से संबंध तोड़ता है तो यह उसके हक में होगा.

Flash-Galerie Anschläge Mumbai Indien 2008

रिपोर्ट पर बात कर रहे आर्मिटेज ने कहा कि अगर भारत में 2008 के मुंबई हमलों जैसा एक और हमला होता है तो भारत पाकिस्तान के बीच लड़ाई छिड़ जाएगी. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपीलों, दबाव या फिर कड़ाई से अमेरिका पाकिस्तान को आतंकवादियों पर लगाम कसने के लिए नहीं मना पाता तो भविष्य में बहुत खतरनाक स्थिति पैदा हो सकती है.

टास्क फोर्स का काम शोध संस्थान काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस ने प्रायोजित किया है. बरजर का कहना है कि अफगानिस्तान में वहां की सेना अब प्रशिक्षित है लेकिन देश में बाकी क्षेत्रों के विकास से इतनी संतुष्टि नहीं मिल रही है.

रिपोर्ट में कहा गया है, "हम जानते हैं कि हम किस तरह के खतरे का सामना कर रहे हैं. लेकिन हमें यह भी पता है कि वर्तमान रणनीति में कितने पैसे लग रहे हैं. हम इस कीमत का समर्थन तब तक नहीं कर सकते जब तक रणनीति से कोई फायदे के संकेत न मिले."

हालांकि ओबामा की वर्तमान रणनीति को सराहा भी गया है. साथ ही कहा गया है कि अगर यह प्रभावशाली नहीं है तो सैन्य मिशन को सीमित करने की जरूरत है. कार्यदल के कुछ सदस्यों ने कहा है कि अफगान सेना को बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की और स्थानीय नागरिक सेनाओं को प्रशासन में जोड़ना की कोशिश की जानी चाहिए. इन दलों को फिर तालिबान के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकेगा.

वर्तमान अफगान रणनीति के मुताबिक अल कायदा और उसके तालिबान समर्थको को खत्म करने की योजना है. दिसंबर में अफगान युद्ध का विश्लेषण किया जाना है. प्रशासन अब 2011 तक अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी को कम महत्त्व दे रहे हैं. अफगानिस्तान में बढ़ती हिंसा को देखते हुए अमेरिका को वहां कुछ और दिन रहने होंगे.

अमेरिकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स और विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन ने कहा कि उन्हें अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई की योजना देखने का मौका मिला. इसके मुताबिक 2014 तक अफगान प्रशासन देश की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले लेगी.

रिपोर्टः रॉयटर्स/एमजी

संपादनः एस गौड़

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