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दुनिया

अफगानिस्तान पर हक जमाते करजई

अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने अमेरिकी सैनिकों को वरदक प्रांत से बाहर निकलने के आदेश दिए हैं. करजई का आरोप है कि स्थानीय अफगानों के साथ काम करने से आम लोगों में नफरत बढ़ी है.

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वरदक प्रांत

अमेरिकी सैनिक दो हफ्तों के भीतर वरदक प्रांत से विदा लेंगे. अमेरिकी सेना ने कहा है कि अफगान अधिकारियों के साथ वह करजई के आरोपों की जांच करेगा. 2011 अगस्त में तालिबान ने एक हेलिकॉप्टर को मार गिराया था जिसमें आठ अफगान और 30 अमेरिकी मारे गए थे. करजई का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों के साथ काम कर रहे अफगान आम और बेकसूर लोगों को पकड़ते हैं, उन्हें परेशान करते हैं और उनकी हत्या भी करते हैं.

विश्लेषकों के मुताबिक करजई के आदेश से पता चलता है कि काबुल अमेरिका के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय सैनिकों पर ज्यादा विश्वास नहीं करना चाहता. साथ है अफगान सरकार स्थानीय मिलिशिया पर भी नियंत्रण करना चाहती है. इन छोटे गुटों को अमेरिकी सैनिकों का सहयोग मिलता है लेकिन इनके काम के बारे में अफगान सरकार को कम जानकारी है.

Selbstmordattentat vor NATO Stützpunkt in Sajedabad Afghanistan

नाटो कैंप पर हुए हमले

लेकिन कई विश्लेषकों का यह भी मानना है कि करजई जल्दबाजी कर रहे हैं. अफगानिस्तान ऐनेलिस्ट्स नेटवर्क के मार्टिन वैन बिलर्ट कहते हैं, "देख कर लगता है कि फैसला बहुत जल्दी और भावुक होकर लिया गया है और इसके पीछे अफगान सरकार की कुंठा भी है कि ऐसी अफगान और अंतरराष्ट्रीय ताकतें हैं, जिन पर नियंत्रण नहीं रखा जा सकता है."

वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने अफगान अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि अंतरराष्ट्रीय सेना ने हत्या और यातना के आरोपों की जांच में साथ नहीं दिया, जिसके बाद अफगान सरकार को यह फैसला लेना पड़ा. अमेरिकी अखबार ने एक छात्र की कहानी बताई है जिसे रात को उसके घर से ले जाया गया. दो दिन बाद उसकी लाश मिली, उसके शरीर पर उत्पीड़न के निशान थे और उसके गले को काट दिया गया था. अफगानिस्तान में माना जाता है कि अमेरिकी सेना स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देती है और इनमें से कई गुट अफगान सेना के नियंत्रण में नहीं हैं.

लेकिन विश्लेषक उमर शरीफी कहते हैं कि करजई का फैसला स्थानीय लोगों को खुश करने के लिए है क्योंकि उनकी सरकार को पता है कि अमेरिकी सेना के बिना वह कुछ खास नहीं कर पाएंगे, "करजई दिखाना चाहते हैं कि वह नियंत्रण कर सकते हैं, कि वह किसी की कठपुतली नहीं हैं. क्यों, क्योंकि वह लगातार गैरजरूरी होते जा रहे हैं. अफगान इस युद्ध को बिना अंतरराष्ट्रीय मदद के नहीं जीत सकते. करजई की सरकार में किसी को भी इस बात पर शक नहीं."

हाल ही में करजई ने अफगान सेना को नाटो हवाई हमलों में साथ देने पर रोक लगाई है. 2014 में अंतरराष्ट्रीय सेना अफगानिस्तान से निकलना शुरू होगी. अफगान सैनिकों की ट्रेनिंग और मदद के लिए कुछ सैनिक वापस रह जाएंगे, लेकिन उनकी संख्या अभी तय नहीं हुई है. हो सकता है कि 8,000 से लेकर 12,000 अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान में रह जाएं.

रिपोर्टः एमजी/एजेए (एएफपी, रॉयटर्स)

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