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दुनिया

'अपने बच्चों को कैसे मार सकता है भारत'

माओवादी नेता आजाद और स्वतंत्र पत्रकार हेमचंद पांडे के एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाएं हैं. सर्वोच्च अदालत ने सरकार से कहा है कि हमारा गणत्रंत अपने बच्चों को नहीं मार सकता. सरकार से मांगा संतोषजनक जवाब.

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सुप्रीम कोर्ट ने माओवादी नेता राजकुमार उर्फ आजाद और हेमचंद्र पांडे को मारने पर अफसोस जताया. इन दोनों को बीते साल पुलिस ने आंध्र प्रदेश के जंगलों में एक मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया. मुठभेड़ के खिलाफ स्वामी अग्निवेश और पांडे के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अफताब आलम और आरएम लोढ़ा ने मुठभेड़ और सरकार की मंशा पर मायूसी जाहिर की. बेंच ने कहा, ''हमारा गणतंत्र इस ढंग से व्यवहार नहीं कर सकता कि वह अपने ही बच्चों को मार दे.''

मामले पर नाराजगी और गंभीरता जताते हुए अदालत ने सरकार से सफाई मांगी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''हमें उम्मीद हैं कि इस बारे में जवाब दिया जाएगा. इसका ठोस और संतोषजक जवाब होगा. सरकार को कई सवालों का जवाब देना होगा.'' यह कहते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार और आंध्र प्रदेश पुलिस को नोटिस जारी किया है. दोनों से छह हफ्ते के भीतर जवाब मांगा गया है.

आजाद माओवादियों के प्रवक्ता थे. उन्हें उत्तराखंड के पिथौरागढ़ शहर के पत्रकार हेमचंद्र पांडे के साथ एक जुलाई 2010 को मुठभेड़ में मारने का दावा किया गया. स्वामी अग्निवेश का आरोप है कि आजाद और पांडे को फर्जी मुठभेड़ में मारा गया. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक आजाद केंद्र सरकार के प्रतिनिधि मंडल से बातचीत करने की आगे आ रहे थे, लेकिन इसी दौरान झांसे से पुलिस ने उन्हें और उनका इंटरव्यू लेने गए पांडे को गिरफ्तार कर लिया और फिर जंगलों में ले जाकर मार डाला.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कहा गया है कि दोनों को बेहद करीब से गोली मारी गई. शरीर पर बने गोलियों निशानों से भी पुलिस के मुठभेड़ के दावे पर सवाल उठ रहे हैं. इसी को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र और आंध्र पुलिस के खिलाफ याचिका दायर की गई है. याचिका में कहा गया है कि फर्जी मुठभेड़ के जरिए हत्या की गई और नागरिक अधिकारों का हनन किया गया.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: आभा एम

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