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ताना बाना

अपने गांव में अपनी कौड़ी

कॉन्सटैंस झील के पास डोनाउ या डेन्युब नदी के तट पर जर्मनी का छोटा सा कस्बा रीडलिंगेन. आबादी है सिर्फ़ दस हज़ार. और इस छोटे से कस्बे ने यूरो को चुनौती देते हुए अपनी मुद्रा डोनाउ टालर चलाने की ठानी है.

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यूरो को चुनौती

धन नदी की तरह है. समूचे इलाके को वह जल, और उसी के साथ जीवन देता है. कम से कम जब तक उसे बांधकर उसका पानी और कहीं न बहाया जाए. लेकिन धन के साथ यही हो रहा है. - डोनाउ टालर नाम से मुद्रा चलाने वालों का घोषणापत्र इन शब्दों के साथ शुरू होता है. वे चाहते हैं कि उनके इलाके की क्रय क्षमता इलाके में ही रहे, और स्थानीय अर्थनीति में उछाल लाए. इलाके में एक नई मुद्रा शुरू करने की उनकी पहल का अब तक स्वागत ही किया गया है.

अपने इलाके में हम अपनी मुद्रा चलाएंगे, और यूरो के साथ उसे बदला जाएगा. डोनाउ टालर के प्रवर्तकों ने यह बीड़ा उठाया है. इलाके के अनेक उद्यम इस पहल का स्वागत कर रहे हैं, जिनमें एक मशहूर सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा भी शामिल है. ज़ाहिर है कि यूरो को ठुकराया नहीं जाएगा. यह गैरकानूनी है. लेकिन एक वैकल्पिक मुद्रा के रूप में इस पहल को शुरू करने वाले चाहते हैं कि इलाके का धन इलाके में ही रहे. पहल से जुड़े हुए योज़ेफ़ हॉफ़मान्न का कहना है कि लोग ख़रीदारी करने रावेन्सबुर्ग चले जाते हैं, और फिर शिकायत

Donau bei Pondorf

डेन्युब की सुरम्य घाटी

करते हैं कि रीडलिंगेन में क़ायदे की दुकान नहीं है. बच्चों को जेबखर्च के तौर पर यूरो दिए जाते हैं, और वे उस पैसे से इंटरनेट पर खरीदारी करते हैं.

तो क्या यह सब बंद हो जाएगा? नहीं, लेकिन इस पहल के चलते स्थानीय अर्थनीति को बचाने व उसे विकसित करने की एक चेतना ज़रूर पैदा हुई है. साथ ही यह समझ भी कि नागरिक पहल के ज़रिये कम से कम स्थानीय स्तर पर सिर्फ़ सामाजिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी कुछ न कुछ किया जा सकता है. इससे नागरिकों के बीच एकजुटता भी बढ़ी है.

क्या रीडलिंगेन जर्मनी में अकेली मिसाल है? कितनी ऐसी मिसालें हैं, कहना मुश्किल है, लेकिन हैं. उनकी संख्या तीस के आसपास बताई जाती है. गोदीनगर ब्रेमेन में सन 2001 से रोलांड नाम की मुद्रा चलाई गई है, 110 दुकानों में इसे स्वीकारा जाता है. श्लेसविग होलश्टाइन प्रदेश में भी ऐसी एक मुद्रा है और माग्डेबुर्ग शहर में उरश्ट्रोमटालर नाम से एक मुद्रा चालू की गई है. कुछ मुद्राएं थोड़े समय के बाद ख़त्म हो जाती हैं, कुछ चलती रहती हैं.

क्या यह अपने आप को छोटे से दायरे में समेटना नहीं है? डोनाउ टालर के प्रवर्तकों का कहना है कि ऐसी बात नहीं है. वे स्थानीय स्तर पर क़दम उठा रहे हैं, लेकिन उनकी सोच में सारी दुनिया शामिल है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उज्ज्वल भट्टाचार्य

संपादन: एन रंजन

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