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दुनिया

अनुशासन ने ली जान

तेज हवा और लहरों के कारण दक्षिण कोरिया की डूबी फेरी से लोगों को ढूंढना रक्षा कर्मियों के लिए मुश्किल हो रहा है. फेरी में स्कूली बच्चों और टीचरों समेत 477 यात्री सवार थे जिनमें से अब तक सिर्फ 179 को बचाया जा सका है.

अब तक 11 लोगों के मृत होने की पुष्टि हुई है. हालांकि समय बीतने के साथ साथ बाकी बचे लोगों के जिंदा होने की संभावना घटती जा रही है. दुर्घटना में बच कर लौटे लोगों का कहना है कि उन्हें चुपचाप रहने और अपनी जगह से न हिलने के निर्देश दिए गए थे.

उनका कहना है कि इन निर्देशों का पालन करने के कारण कई लोग हॉल के भीतर ही फंसे रह गए, बाहर नहीं निकल सके. लापता लोगों की फेरी के अंदर फंसे होने आशंका जताई जा रही है. अब तक बार बार बदल रहे सरकारी आंकड़ों की आलोचना भी हो रही है.

दक्षिण कोरिया के दक्षिणी द्वीप के पास यह फेरी देखते देखते दो घंटे के अंदर डूब गई. हादसे के समय फेरी पर सवार 340 बच्चे और स्कूली टीचर छुट्टियां मनाने जेजू रिसॉर्ट जा रहे थे. पीड़ित माता पिता ने सरकार पर रक्षा कार्य में ढीलेपन का आरोप लगाया है. वे जानकारी न मिल पाने से भी नाराज हैं. जबकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि खोज कार्य रात भर जारी रहा.

तूफान और लहरों से मुश्किल

तट रक्षक अधिकारियों के मुताबिक जिस जगह फेरी डूबी वह दक्षिण कोरियाई तट का सबसे भारी लहरों वाला इलाका है. इस कारण पानी के अंदर जाकर ढूंढने में गोताखोरों के लिए खासी मुश्किल हो रही है. वेब सोलस नाम की कंपनी ने फेरी के अंदर खोज के लिए पानी के भीतर काम करने वाला ड्रोन मुफ्त में देने की बात कही है.

फेरी के डूबने की क्या वजह थी इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. 20 साल पहले जापान में निर्मित यह जहाज इस रास्ते पर नया भी नहीं था. कोरियाई समाचार संस्था वाईटीएन ने जांच में लगे अधिकारियों के हवाले से कहा कि हवा के भारी और घुमावदार झोंकों की वजह से डेक पर रखे कंटेनर एक तरफ लुढ़क गए जिसकी वजह से फेरी एक ओर लुढ़क गई.

चुप रहने की हिदायत

हादसे में बचाए गए लोगों का कहना है कि जब फेरी ने डूबना शुरू किया तो उनसे बार बार यही कहा गया कि वे अपनी सीट न छोड़ें. वे लोग जो इस निर्देश का ज्यादा देर तक पालन करते रहे उन्हें खुद को बचाने के लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ा. हादसे से बच कर बाहर निकले किम सुंग मूक ने बताया उन्हें जहाज के चौथे माले पर एक हॉल में फंसे बच्चों में से 30 को बाहर निकालने में बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा, "मैं हॉल के अंदर भी नहीं जा पा रहा था क्योंकि सब कुछ इतनी बुरी तरह पलट रहा था. जहाज पानी में डूबता जा रहा था और उनके आस पास ऐसा कुछ नहीं था जिसे वे थाम सकें. वे फर्श पर ऊपर भी नहीं खिसक पा रहे थे क्योंकि वे बार बार फिसल जाते थे." वह बताते हैं कि उनके बस में बहुत कुछ नहीं था क्योंकि बच्चे बहुत सारे थे और वह अकेले उन सबको नहीं बचा सकते थे.

फेरी से बच कर बाहर आए एक अन्य यात्री ने बताया कि जब फेरी डूबनी शुरू हुई तो उसके तीस से चालीस मिनट तक कई लोग अपनी जगह पर बैठे रहे. हू युंग की के मुताबिक बार बार यह संदेश दिया जा रहा था कि लोग अपनी जगह पर बैठे रहे, हिलें नहीं.

उन्होंने कोरियाई समाचार एजेंसी से कहा, "हम अपने आप से पूछ रहे थे कि क्या हमें अपनी जगह से उठना नहीं चाहिए? क्या हमें बाहर निकलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए?" माना जा रहा है कि करीब 300 लोग जिनका अभी तक पता नहीं चला है वे फेरी के अंदर ही फंसे रह गए.

एसएफ/एएम (रॉयटर्स)

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