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Radio D Teil 2

अध्याय 44: महान चिंतकों का नगर

18वीं सदी में अनेक महान चिंतक दूसरे नगरों से येना आए. इनमें शामिल थे प्रसिद्ध कवि फ्रीडरिष शिल्लर. येना विश्वविद्यालय में उनके पहले व्याख्यान पर फिलिप और पाउला एक रूपक तैयार करते हैं.

पुरानी लिपि वाले बोर्ड के सामने खड़ा एक आदमी.

कवि फ्रीडरिष शिलर लोगों को अचंभित कर देते हैं.

18वीं सदी के येना में पहुंचते हुए श्रोता इस अध्याय में शिल्लर और गोएठे के बारे में कुछ जानकारी हासिल कर सकते हैं. यहां शिल्लर ने विश्वविद्यालय में 29 साल की उम्र में अपना पहला व्याख्यान दिया था. 500 से अधिक छात्र इस व्याख्यान को सुनना चाहते थे. भीड़ की वजह से आनन फानन में व्याख्यान के लिए एक नए हॉल की व्यवस्था करनी पड़ी थी.

प्रोफेसर श्रोताओं को भूतकाल से भविष्य की ओर ले जाते हैं और इस बार वे भविष्य सूचक क्रिया werden के बारे में बताते हैं.

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