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Radio D Teil 2

अध्याय 32: खरगोश और साही

“अगर दिमाग तेज न हो, तो पैर तेज होने चाहिए'' एक कहावत है. लेकिन कभी कभी यह काफी नहीं होता है. ओयलालिया श्रोताओं को एक सनसनीखेज कहानी सुनाती है. उसे भी एक खास रेस के बारे में पता है.

Zulieferer: Zwei Igel stehen an den beiden Enden eines Weges. Dazwischen läuft der Hase.

Der Igel spielt dem Hasen einen bösen Streich

राडियो डी से परीकथा: ग्रुएनहाइडे जैसा किस्सा साही के साथ भी हुआ था, जिसने लंबी टांगों वाले खरगोश को एक रेस की चुनौती दी थी. अपनी पत्नी के साथ वह घमंडी खरगोश को एक सीख देना चाहता था कि बड़बोली का क्या नतीजा होता है.

कहानी मुख्यतः भूतकाल में कही जाती है. प्रोफेसर को फिर एक मौका मिलता है कि क्रिया के भूतकाल Vergangenheitsform की जांच की जाए. इस बार अनियमित क्रियाओं के साथ भी, जिनमें कुछ मुसीबतें छिपी हुई हैं.

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