″अदालत तय करेगी अमेरिकी बंदूकधारी की किस्मत″ | जर्मन चुनाव 2017 | DW | 01.02.2011
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जर्मन चुनाव

"अदालत तय करेगी अमेरिकी बंदूकधारी की किस्मत"

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा है कि लाहौर में दो लोगों की हत्या के आरोपी अमेरिकी कर्मचारी के भाग्य का फैसला अदालतें करेंगी. अमेरिका अपने दूतावास कर्मचारी की रिहाई के लिए दबाव डाल रहा है.

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डेविस की रिहाई के लिए दबाव

अमेरिकी कांग्रेस के छह प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति जरदारी ने रेमंड्स डेविस को रिहा करने को कहा है. डेविस को लाहौर में मोटरसाइकल पर सवार दो लोगों की हत्या के बाद गिरफ्तार किया गया. अमेरिका का कहना है कि डेविस में अपने बचाव में गोली चलाई. डेविस के मुताबिक दोनों लोग उन्हें बंदूक की नोक पर लूटना चाहते थे. तीसरा आदमी डेविस की मदद के लिए भेजी गई गाड़ी के नीचे आकर मरा.

बताया जाता है कि अमेरिकी सांसदों से हुई मुलाकात में जरदारी ने कहा, "बेहतर होगा कि इस मामले में कानूनी कार्यवाही पूरा होने तक इंतजार किया जाए." अमेरिकी दूतावास का कहना है कि यह बैठक पिछले हफ्ते गोलीबारी की घटना से काफी पहले ही तय हो चुकी थी. राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरतुल्लाह बाबर ने बताया कि राष्ट्रपति ने अमेरिकी सांसदों की चिंताओं पर ध्यान दिया और कहा कि मामला अभी अदालतों के सामने है.

इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास ने भी डेविस की तुरंत रिहाई की अपील की है. दूतावास के मुताबिक डेविस लाहौर के वाणिज्य दूतावास में कर्मचारी है और इस नाते उन्हें मुकदमे से राजनयिक रियायत दी जानी चाहिए. लेकिन पाकिस्तानी अदालतों ने डेविस की रिहाई से इनकार किया है.

सोमवार को एक पाकिस्तानी वकील ने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि डेविस को अमेरिका को न सौंपा जाए. वकील सईद जफर ने कहा, "चूंकि दो पाकिस्तानी मारे गए और तीसरी मौत भी इससे जुड़ी घटना में हुई है, और यह सब डेविस की वजह से हुआ, इसलिए यह मुकदमा पाकिस्तान में ही चलना चाहिए." अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि लाहौर के चीफ जस्टिस ने इस बारे में सरकार को अपनी राय देने के लिए नोटिस जारी किया है.

मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में इस मुद्दे को लेकर अमेरिका विरोधी भावनाएं एकदम भड़क गई हैं जो कबायली इलाकों में होने वाले संदिग्ध अमेरिकी ड्रोन हमलों से पहले ही काफी तेज हैं. अमेरिकी दूतावास का कहना है कि डेविस दूतावास में तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ के सदस्य हैं. डेविस का दर्जा अब तक स्पष्ट नहीं है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एमजी

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