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दुनिया

अत्यंत गहरे दोस्त हैं जर्मनी और इस्राएल

आज से 50 साल पहले जब जर्मनी और इस्राएल ने कूटनीतिक संबंधों की स्थापना का फैसला किया तो किसी को पता नहीं था कि दोनों देशों और दोनों समाजों के संबंध किस तरह विकसित होंगे. इस्राएल में इस फैसले का हिंसक विरोध हुआ था.

इस्राएल में पहले जर्मन राजदूत रॉल्फ पाउल्स का 1965 में विरोध प्रदर्शन के साथ स्वागत हुआ था और उनपर टमाटर फेंके गए थे. आज जर्मनी में इस्राएल के पूर्व राजदूतों आवी प्रिमोर और शिमोन श्टाइन को अक्सर रेडियो और टेलिविजन शो पर बुलाया जाता है. दोनों ही पूर्व राजनयिक जर्मन राजनीतिज्ञों के साथ इस पर एकराय हैं कि दोनों देशों के बीच संबंध शायद ही और बेहतर हो सकते थे. प्रिमोर का कहना है, "इसकी वजह मानवीय संबंध हैं." औपचारिक संबंधों की स्थापना से पहले ही और राजनीतिक इरादों के विपरीत जर्मनों और इस्राएलियों के बीच व्यक्तिगत संपर्कों की शुरुआत हो गई थी जो बाद में चलकर राजनीतिक संबंधों की बुनियाद बने. शोध और विज्ञान के क्षेत्र में गहरे संबंधों की शुरुआत 1950 के दशक में वाइजमन इंस्टीट्यूट और माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट के बीच संपर्कों के साथ शुरू हुई. इस बीच 2012 से दोनों संस्थानों द्वारा शुरू किया गया एक संयुक्त इंस्टीट्यूट भी है.

एक दूसरे से प्यार

सांस्कृतिक आदान प्रदान के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध बहुत गहरे हैं. दोनों ही देशों में एक दूसरे की संस्कृति, साहित्य, फिल्म और संगीत में गहरी दिलचस्पी है. नियमित रूप से लेखकों की गोष्ठियां, संयुक्त फिल्म महोत्सवों और कला प्रदर्शनियों का आयोजन होता रहता है. बर्लिन में इस बीच बहुत से इस्राएली कलाकार और डिजायनर रहते हैं, जिन्हें अलग कर शहर के सांस्कृतिक जीवन के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. इस्राएल में जर्मनी के पूर्व राजदूत रुडोल्फ ड्रेसलर कहते हैं, "जर्मन राजधानी इस्राएलियों के लिए आकर्षण बन गयी है." एक आकलन के अनुसार बर्लिन में 20,000 इस्राएली रहते हैं.

Junge Deutsche in Israel

इस्राएल में जर्मन वोलंटियर

उनमें से एक हैं 27 साल की हाडर ब्राउन जो वानजे विला में वोलंटियर है जहां नाजियों ने यूरोपीय यहूदियों को नेस्तनाबूद किए जाने का फैसला किया था और अब एक स्थायी संग्रहालय है. वह बताती है, "जब मैं जर्मनों को बताती हूं कि मैं इस्राएली हूं, तो वे बताते हैं कि तेलअवीव दुनिया का सबसे दिलचस्प शहर है. और जब मैं इस्राएल में बताती हूं कि मैं बर्लिन में रहती हूं, तो वे कहते हैं कि बर्लिन दुनिया का सबसे मस्त शहर है." ऐसा ही अनुभव जर्मनी की एस्थर बुक का रहा है जिन्होंने वोलंटियर के रूप में इस्राएल में जनसंहार में जीवित बच गए लोगों के बीच काम किया है. वे बताती हैं कि उनका जर्मन होना उनके लिए कोई समस्या नहीं था. 1969 से दोनों देशों के बीच युवाओं के आदान प्रदान के कार्यक्रम चल रहे हैं जिनमें अब तक दोनों देशों के 9,000 से ज्यादा युवा हिस्सा ले चुके हैं.

अंतिम असली दोस्त

राजनीतिक स्तर पर भी जर्मनी और इस्राएल के संबंध गहरे और भरोसेमंद हैं. दोनों देशों की सरकारें हर साल परमर्श के लिए मिलती हैं. जर्मन विदेश मंत्री प्रांक वाल्टर श्टाइनमायर ने हर साल होने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक के बारे में कहा, "हम साल में एक बार एक बड़ी मेज पर साथ बैठते हैं, परियोजनाएं तय करते हैं, वहां ठहाके लगते हैं, बहस होती हैं, जैसा कि अच्छे दोस्त करते हैं." श्टाइनमायर की पार्टी एसपीडी के सालों से इस्राएल की लेबर पार्टी के साथ संबंध हैं, दोनों ही सोशलिस्ट इंटरनेशनल के सदस्य हैं. लेबर पार्टी के सांसद मिशाल बीरान कहती हैं, "जर्मनी इस्राएल का असली दोस्त है." तीस साल पहले उसके पश्चिम में हर कहीं साथी थे, लेकिन इस बीच वह मध्यपूर्व नीति के कारण व्यापक रूप से अलग थलग है.

Berlin Protest gegen Krieg in Israel Gaza 05.08.2014

गजा पर हमले के विरोध में प्रदर्शन

लेकिन दूसरी आवाजें भी हैं जो दोनों देशों के अच्छे संबंधों पर बीच बीच में साया डालती रहती हैं. चांसलर अंगेला मैर्केल की सीडीयू के सांसद फिलिप मिसफेल्डर ने बर्लिन के एक वाकये की ओर ध्यान दिलाया जब पुलिस ने एक फुटबॉल मैच के दौरान इस्राएली झंडे को लहराने पर रोक लगा दी थी. उन्होंने कहा कि इस तरह की रुझानों के खिलाफ समाज को आवाज उठानी होगी. बैर्टेल्समन के एक सर्वे के अनुसार इस्राएल से जर्मनों की दूरी बढ़ रही है. इसके अनुसार दो तिहाई इस्राएली जर्मनी का सकारात्मक मूल्यांकन करते हैं जबकि 62 फीसदी जर्मनों के मन में इस्राएल की नकारात्मक तस्वीर है और 65 फीसदी नरसंहार केअतीत पर बहस की समाप्ति चाहते हैं. ग्रीन पार्टी की नेता कातरीन गोएरिंग एकहार्ड कहती है, "कभी भूलना नहीं, कोई कर्ज नहीं है, यह एक अहम विरासत है जिसे हमें आगे बढ़ाना है."