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मनोरंजन

अजी नाम में क्या रखा है

हैरी पॉटर लिखने वाली जेके रोलिंग ने अपना पहला क्राइम नॉवेल, 'द कुकूज कॉलिंग' रॉबर्ट गैलब्रेथ नाम से लिखा. ऐसा कर उन्होंने पेन नेम की लंबी परंपरा को ही आगे बढ़ाया, जिसमें उनके अलावा दूसरे प्रसिद्ध नाम भी हैं.

किताबों की दुनिया एक ऐसे तालाब जैसी है जिसमें बहुत सारी छोटी-छोटी मछलियां हैं और कुछेक बड़ी. जब एक साधारण से माहौल में कुछ बड़ा हो जाए तो तालाब की लहरें बड़ी हो जाती हैं. ऐसा ही कुछ पिछले महीने हुआ जब जोएन के रोलिंग के चेहरे का नकाब हट गया कि 'द कुकूज कॉलिंग' की लेखक वही हैं. हैरी पोटर के कई खंडों की बेस्टसेलर लेखिका ने ये किताब रॉबर्ट गैलब्रेथ के छद्मनाम से लिखी थी.

स्त्री या पुरुष

इस पर्दाफाश पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं आईं. एक ओर तो लेखिका के लिए प्रशंसा थी जिन्होंने इतने सारी बेस्ट सेलर किताबों की प्रसिद्धि के बाद आने वाला तनाव नकली नाम या पेन नेम के जरिए हल्का किया. वहीं दूसरी ओर लोगों की आलोचना भी थी कि किसी मशहूर लेखिका को किसी पुरुष नाम के पीछे छिपने की क्या जरूरत है.

लेखन इतिहास में छद्मनाम का इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है. कुछ मामलों में तो पहचान गंभीर कारणों से छिपाई जाती थी कि इन लेखकों का कोई पीछा न करे, उन्हें प्रताड़ित न किया जाए. जर्मनी के लेखक एरिष कैस्टनेर के नाजी दौर में लिखने पर रोक लगा दी गई थी लेकिन वे बैर्टोल्ड बुर्गर, मेल्खियोर कुर्त्स और रोबर्ट नॉयनर के नाम से काफी कुछ लिखते रहे.

इसके हालिया उदाहरण अल्जीरियाई लेखक मोहम्मद मूलेसहूल हैं जो अपनी पत्नी यास्मीना खद्रा के नाम से लिखते हैं. महिला लेखक तो अक्सर इसलिए पुरुषों के नाम से लिखती हैं ताकि उनका काम छप जाए. 20वीं सदी तक कई यूरोपीय देशों में ऐसे नियम थे जिनके तहत महिलाएं अपने पति की अनुमति के बिना पैसा नहीं कमा सकती थी. जॉर्ज सैंड (अमादिन ओरोर लुसिल दुपों द फ्रांकोई) और जॉर्ज इलियट (मैरी ऐन इवान्स) ने पुरुषों के नाम इस्तेमाल कर अपनी लेखनी की आजादी बनाए रखी और काफी मशहूर भी हुईं. ब्रोन्टे बहनों ऐन, शार्लोट और एमिली ने भी एक्टन, क्यूरर, और एलिस बेल नाम से लिखा.

जासूसी उपन्यास

Jane Austen

जेन ऑस्टेन ज्यादातर सामाजिक उपन्यास लिखती थीं.

ये सारे उदाहरण इतिहास के हैं लेकिन आज भी महिला और पुरुष लेखक कई बार एक ही तरह के लेखन से पहचाने जाने लगते हैं. सदियों से सोचा जाता रहा है कि महिलाएं हमेशा रोमानी उपन्यास ही लिखेंगी और पुरुष पेपरबैक थ्रिलर.

आज भी कई महिला उपन्यासकार पुरुषों के नाम से लिखती हैं. इनमें रहस्य रोमांच वाले नॉवेल लिखने वाली पीडी जेम्स शामिल हैं. जर्मनी में जेके रोलिंग अपने सही नाम से जानी जाती हैं लेकिन ब्रिटेन और अमेरिका में उनकी किताबों पर सिर्फ जे.के नाम ही होता है.

जर्मनी में लेखक संघ के प्रवक्ता एडगर फ्रांत्समन कहते हैं कि उनके यहां 800 सदस्यों में जितने पुरुष हैं उतनी ही महिलाएं हैं और वे ऐसी किसी भी महिला लेखक को नहीं जानते जो पुरुष नाम के साथ लिखती हों.  बीलेफेल्ड में पेंड्रागोन पब्लिशिंग हाउस के निदेशक गुन्टर बुटकुस कहते हैं कि उनका अनुभव भी कुछ ऐसा ही है कि पुरुष और महिला लेखक कभी विपरीत लिंग वाला छद्मनाम इस्तेमाल नहीं करते. 

1960 से जर्मनी में पाठकों और प्रकाशकों के लिए रहस्यमयी महिला लेखक कोई मुद्दा ही नहीं है. उस समय एडगर वालेस अवॉर्ड के लिए बिना नाम बताए भेजे गए उपन्यास डेथ इन सेंट पाउली को चुना गया. जब जूरी को ये पता चला कि लिखने वाली एक महिला है वे ये इनाम रोकना चाहते थे. बाद में यही महिला इरेने रोड्रियान जर्मन क्राइम फिक्शन का नींव रखने वाली मुख्य लेखिका बनी.

तब से लेखन में लिंग भेद नहीं के बराबर रह गया, हालांकि अभी भी कई लेखक पेन नेम के साथ लिखते हैं. कोरा श्टेफान आने चैपलेट के नाम से लिखती हैं. वे कहती हैं कि उनका नाम ग्लेमरस नहीं था. "मेरे लिए पेन नेम अहम था क्योंकि मैं मशहूर होना चाहती थी. मुझे लगा कि मेरे असली नाम के साथ मुझे क्राइम राइटर के तौर पर कोई गंभीरता से नहीं लेगा. नए लेखक के तौर पर ये लोकप्रियता पाना बढ़िया था. यह एक उपहार था." शायद रोलिंग के रॉबर्ट गैलब्रेथ नाम से लिखने के पीछे भी यही चाहत रही होगी.

रिपोर्टः होल्गर एलिंग/एएम

संपादनः महेश झा

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